पोर्ट्समाउथ, 19 जनवरी (द कन्वरसेशन) ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस येल्तसिन सशस्त्र फौजों में कटौती के अपनी सरकार के फैसले के बचाव के लिए जब नवंबर 2021 में यूके के हाउस ऑफ कॉमन्स की रक्षा समिति के सामने पेश हुए थे तो उन्होंने घोषणा की थी कि ‘‘यूरोपीय धरती पर बड़े टैंक से युद्ध लड़ने की पुरानी अवधारणाएं खत्म हो गई हैं’’।
समिति के अध्यक्ष टोबियास एलवुड ने उल्लेख किया था कि यूक्रेन से लगती रूस की सीमा पर टैंकों का जमावड़ा बढ़ रहा है और ब्रिटेन अपने बेड़े को कम कर रहा है।
ठीक एक साल बाद, 11 महीने के संघर्ष के दौरान यूक्रेन में क्रूर बख्तरबंद लड़ाई एलवुड की चिंताओं की पुष्टि करती है। कुछ समय से यूक्रेन अधिक और बेहतर हथियार प्रणालियों जैसे लंबी दूरी के तोपखाने और विमान के लिए सहयोगियों से याचना कर रहा है।
लेकिन उस सूची में सबसे ऊपर मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी) रहे हैं। टैंक, अपनी बड़ी बंदूकों, गति और भारी कवच के साथ जमीन पर कब्जा करने के लिए सटीक क्षमता और गति प्रदान करते हैं। अब तक, पोलैंड और चेक गणराज्य के सोवियत-डिज़ाइन किए गए लेकिन संशोधित (क्रमशः चेक और पोलिश इंजीनियरों द्वारा) टी72 टैंकों के कुछ उपहारों के अलावा, नाटो देशों से उक्रेन को कुछ नहीं मिला है।
लेकिन 16 जनवरी को इसमें बदलाव आया, जब ब्रिटेन के रक्षा सचिव बेन वालेस ने ब्रिटेन के 227 चैलेंजर 2 टैंकों में से 12 टैंक उक्रेन को देने का इरादा जाहिर किया गया।
ये अत्यधिक प्रभावी हैं और रूस के अधिकांश बेड़े से बेहतर हैं। लेकिन कोई महत्वपूर्ण अंतर लाने के लिए इनकी संख्या अभी बहुत कम है।
यूक्रेन के एमबीटी के स्टॉक को बढ़ावा मिलने की संभावना है, अगर जर्मनी, जैसा कि समझा जाता है, पोलिश और फिनिश के स्वामित्व वाले, लेकिन जर्मन निर्मित लैपर्ड टैंकों को यूक्रेन भेजने को तैयार होता है। यह कई अन्य देशों के लिए भी इस दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
यह सोचना ठीक नहीं होगा कि यूक्रेन को मिलने वाले अपेक्षाकृत पुराने लैपर्ड 2 ए 4 किस्म के यह टैंक युद्ध-विजेता होंगे, विशेष रूप से इनकी संख्या को देखते हुए। लेकिन, अधिक महत्वपूर्ण रूप से यूक्रेन की सुरक्षा के लिए, वे पश्चिमी समर्थन में एक बदलाव और यूक्रेन को पहले से अधिक परिष्कृत नाटो गियर से लैस करने की दिशा में एक कदम का प्रतिनिधित्व जरूर करेंगे।
संयुक्त शस्त्र युद्ध
जर्मनी और अमेरिका ने हाल ही में घोषणा की कि वे यूक्रेन को मार्डर और ब्रैडली पैदल सेना से लड़ने वाले वाहन (आईएफवी) भेजेंगे। आईएफवी सेना के पैदल सैनिकों को युद्ध में ले जाते हैं। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये अपने आप में प्रभावी हैं, इन्हें अकेले काम करने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है।
यही वह जगह है जहां टैंक काम आते हैं। युद्ध के आरंभ में, रूस ने उनमें से सैकड़ों को पैदल सेना द्वारा दागे गए टैंक-रोधी निर्देशित मिसाइलों (एटीजीएम) के हाथों खो दिया था, जिनमें प्रतिष्ठित जेवलिन और एनएलएडब्ल्यू शामिल थे। टैंक का चालक दल, एक बहुत भारी स्टील बॉक्स में बंद होता है, इसलिए उसके लिए अक्सर इन सैनिकों को देखना मुश्किल हो जाता है, जो उन्हें भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
तो एटीजीएम के साथ टैंकों को पैदल सेना से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपनी पैदल सेना को अपने साथ लाएं। आप ऐसा ब्रैडली और मार्डर जैसे आईएफवी से करते हैं। ये स्वचालित तोपों और मशीनगनों से सुसज्जित होते हैं, जब वे उतरते हैं तो पैदल सेना के लिए कवरिंग फायर प्रदान करते हैं।
बदले में ये अधिक हल्के-बख़्तरबंद आईएफवी टैंकों से असुरक्षित होते हैं। इसलिए आईएफवी और टैंक का, एक साथ मिलकर काम करना और तोपखाने के साथ संपर्क करना प्रभावी ‘‘संयुक्त हथियार युद्ध’’ के लिए आवश्यक है। इसे जमीनी लड़ाई में सफलता की कुंजी कहा जाता है।
ऐसे में लगता है कि कई नाटो देश 100 2ए4 के साथ-साथ 100 या इसके आसपास ब्रैडली और मार्डर्स सहित एक ब्रिगेड बनाने के लिए अपने उपहारों को इकट्ठा करेंगे।
पुराना लेकिन प्रभावी
लैपर्ड 2ए4 1986 से 1992 तक बनाए गए थे (हालांकि उन्हें बड़े पैमाने पर अपग्रेड किया गया है) - वे पुराने हैं, लेकिन रूस के टैंक बेड़े के खिलाफ प्रभावी होंगे। लेकिन जब तक अतिरिक्त कवच के साथ संशोधित नहीं किया जाता है, तब तक इन टैंकों के एटीजीएम के लिए कमजोर होने की संभावना है, क्योंकि तुर्की को सीरिया में इसकी लागत का पता चला है।
इस युद्ध में दोनों पक्षों द्वारा संचालित रूसी डिजाइनों की तुलना में नाटो टैंक भारी और बेहतर संरक्षित हैं जैसे टी64 टी72 और टी90 के कई संस्करण। यह मात्रा से अधिक गुणवत्ता पर पारंपरिक नाटो फोकस को दर्शाता है।
विश्वसनीय अनुमान कहते हैं कि रूस ने यूक्रेन में इस्तेमाल किए गए टैंकों में से लगभग दो-तिहाई खो दिए है। इन्हें या तो नष्ट कर दिया गया है या इनपर कब्जा कर लिया गया है। लेकिन रूस के नए टैंक एक खतरा होंगे, जैसे कि टी90एम। यह डिजाइन पहली बार 2017 में सार्वजनिक रूप से सामने आया था। किसी भी मामले में, टैंक-ऑन-टैंक लड़ाई दुर्लभ हैं - इस युद्ध में टैंकों का सबसे बड़ा हत्यारा तोपखाना होने की संभावना है।
वास्तविक महत्व
यूक्रेन ने 300 पश्चिमी टैंक और 500 आईएफवी के साथ-साथ कम से कम 700 आर्टिलरी सिस्टम के लिए कहा है। उनका मानना है कि इससे उन्हें अपने कब्जे वाली जमीनों को आजाद कराने की युद्ध शक्ति मिलेगी। और अब उसे यह सब मिलने की संभावना बढ़ गई है।
यूक्रेन के पास न केवल इस साल और अगले साल तेजी से कमजोर हो रही रूसी सेना को हराने की क्षमता होगी - बल्कि उसकी सशस्त्र सेना भविष्य में फिर से सज्जित होकर रूस के किसी भी हमले के लिए एक निवारक होगी।
यह अगले दशक में यूक्रेन की - और इसलिए यूरोप की - सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY