आइजोल, चार जुलाई मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथांगा ने मंगलवार को भारत के विधि आयोग को पत्र लिखा, जिसमें कहा गया है कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) सामान्य रूप से जातीय अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से मिजो समुदाय के हितों के खिलाफ है।
सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के अध्यक्ष जोरामथांगा ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि यूसीसी मिजो समुदाय के धार्मिक व सामाजिक रीति-रिवाजों और संविधान की धारा 371 (जी) द्वारा संरक्षित उनके पारंपरिक कानूनों के खिलाफ हैं।
एमएनएफ भाजपा के नेतृत्व वाले नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए) का एक घटक दल है। एनईडीए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का क्षेत्रीय संस्करण है।
जोरामथांगा का बयान मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा के इस बयान के बाद आया है कि यूसीसी “अपने वर्तमान स्वरूप में” भारत के दृष्टिकोण के खिलाफ है। संगमा की पार्टी एनपीपी भी एनईडीए की सदस्य है।
जोरामथांगा ने अपने पत्र में लिखा, “चूंकि पूरे भारत में यूसीसी का प्रस्तावित कार्यान्वयन विशेष रूप से संवैधानिक प्रावधान द्वारा संरक्षित मिजो समुदाय की धार्मिक व सामाजिक प्रथाओं और उनके पारंपरिक/व्यक्तिगत कानून के विपरीत है, इसलिए केंद्र की राजग सरकार का उक्त प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
विधि आयोग ने पिछले महीने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर “व्यक्तिगत कानूनों की समीक्षा” विषय के तहत यूसीसी पर विभिन्न हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगी थी।
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