नयी दिल्ली, 30 जुलाई दिल्ली की एक अदालत ने कथित रूप से फर्जी पासपोर्ट, वीजा स्टीकर और सऊदी अरब दूतावास का रबड़ स्टैंप रखने के 20 साल पुराने मामले में आरोपी दो लोगों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अजीत नारायण, सुलेमान खान और हसीबुल रहमान के खिलाफ दायर मुकदमे की सुनवाई कर रहे थे। फराश बाजार थाना पुलिस ने दोनों के खिलाफ 2002 में प्राथमिकी दर्ज की थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, खान के पास से 13 अगस्त, 2002 को छह फर्जी पासपोर्ट, तीन वीजा स्टीकर और सऊदी अरब दूतावास के पांच कथित रबड़ स्टांप बरामद किए गए थे। उसने बताया कि रहमान आरोपी खान का सहयोगी था और पीड़ितों को फंसाने का काम करता था।
मजिस्ट्रेट ने अपने फैसले में कहा, ‘‘मेरा विचार है कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह के परे साबित करने में असफल रहा है, इसलिए दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए आरोपियों को आरोप से बरी किया जाता है।’’
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