देश की खबरें | तृणमूल सांसद ने जयशंकर के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया

नयी दिल्ली, 28 फरवरी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के खिलाफ अमेरिका से भारतीयों के निर्वासन के संबंध में छह फरवरी को उच्च सदन में दिए गए उनके बयान को लेकर विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है।

जयशंकर ने छह फरवरी को राज्यसभा में एक बयान में कहा था कि भारत सरकार अमेरिकी सरकार के साथ बातचीत कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जिन भारतीयों को वापस भेजा जा रहा है, उनके साथ गलत व्यवहार न हो।

उन्होंने कहा था कि वैध यात्रियों के लिए वीजा को आसान बनाने के लिए कदम उठाते समय अवैध प्रवासन उद्योग पर कड़ी कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नोटिस 20 फरवरी को राज्यसभा सचिवालय को सौंपा गया और इसे राज्य सभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के नियम 187 के तहत दाखिल किया गया।

नियम के अनुसार, कोई सदस्य, सभापति की सहमति से, किसी सदस्य या परिषद या समिति के विशेषाधिकार हनन से जुड़ा प्रश्न उठा सकता है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने अमेरिका से जंजीरों में बंधे ''अवैध'' भारतीय प्रवासियों को वापस भेजे जाने की बृहस्पतिवार को कड़ी निंदा करते हुए इसे ''शर्मनाक'' बताया था।

उन्होंने सवाल किया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार ने उन्हें वापस लाने के लिए विमान क्यों नहीं भेजे।

सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की उपनेता घोष ने अपने नोटिस में कहा कि उच्च सदन में जयशंकर के बयान में भ्रामक और अधूरी जानकारी है, जो संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन करता है।

उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री ने सदन को सूचित किया था कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी सरकार से बात कर रही है कि वापस लौट रहे भारतीयों के साथ उड़ान में किसी भी तरह का दुर्व्यवहार न हो, लेकिन निर्वासित भारतीयों के साथ और अधिक उड़ानें आ रही हैं, जो दुर्व्यवहार की गवाही देती हैं।

घोष ने कहा कि यह सदन में मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासनों के विपरीत है।

तृणमूल सांसद ने निर्वासितों को पूरी यात्रा के दौरान हथकड़ी और बेड़ियों में बांधे जाने की खबरों और हिरासत केंद्रों में यातना और खराब परिस्थितियों के आरोपों की ओर इशारा किया।

उन्होंने सरकार पर वीजा धोखाधड़ी पर नकेल कसने में विफल रहने का भी आरोप लगाया और कहा कि मंत्री ने अपने बयान में धोखाधड़ी वाले आव्रजन नेटवर्क की भूमिका के बारे में नहीं बताया।

घोष ने सभापति से मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का अनुरोध किया।

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