नयी दिल्ली, 20 जुलाई अपने कुछ कर्मचारियों को अधिकतम पांच साल के लिए अवैतनिक अवकाश पर भेजने संबंधी एअर इंडिया के फैसले को वापस लेने की मांग करने के महज एक दिन बाद सोमवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ‘ब्रायन ने दावा किया कि यह योजना ‘स्वैच्छिक’’ नहीं है और विमानन कंपनी के विभागीय ज्ञापन और प्रेस में जारी बयान ‘ परस्पर विरोधी ’ हैं।
राज्यसभा सदस्य ने 14 जुलाई का एअर इंडिया का ज्ञापन और 17 जुलाई को प्रेस में जारी विज्ञप्ति को ट्विटर पर साझा करते हुए दस्तावेजों की कुछ पंक्तियों का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि वे ‘‘परस्पर विरोधी’’ हैं।
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उन्होंने ट्वीट किया है, ‘‘इस साक्ष्य के अनुसार, अवैतनिक अवकाश स्वैच्छिक नहीं है। पहली तस्वीर... अवैतनिक अवकाश पर एअर इंडिया की मेमो संख्या 420 और दूसरी तस्वीर... एअर इंडिया की प्रेस विज्ञप्ति, 17 जुलाई को जारी (बिन्दू 2,8 और 9), परस्पर विरोधी हैं।’’
केन्द्र सरकार ने कुछ कर्मचारियों को अधिकतम पांच साल तक अवैतनिक अवकाश पर भेजने के एअर इंडिया के फैसले का समर्थन किया है और इस संबंध में केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी के कहा था कि हर साल 500-600 करोड़ रुपये का निवेश करना संभव नहीं है, ऐसे में खर्च में कटौती आवश्यक है।
एअर इंडिया का यह फैसला कोरोना वायरस महामारी के बीच आया है। इस दौरान सभी उड़ानें रद्द होने से विमानन क्षेत्र को बहुत नुकसान हुआ है।
केन्द्रीय मंत्री पुरी को रविवार को लिखे एक पत्र में ओ’ब्रायन ने उनसे यह सुनिश्चत करने का अनुरोध किया है कि एअर इंडिया अपनी इस अवैतनिक अवकाश योजना को वापस ले।
इसे केन्द्र के पुराने परामर्श के विरुद्ध और ‘‘अमानवीय’’ करार देते हुए तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि सरकार में कोई दयाभाव नहीं है और वह कोविड-19 महामारी के दौरान एअर इंडिया के कर्मचारियों की निस्वार्थ सेवा को स्वीकार करने से इंकार कर रही है।
उन्होंने पत्र में कहा है कि अभी तक एअर इंडिया के करीब 150 क्रर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं।
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