ताजा खबरें | जनजाति विधेयक चर्चा तीन अंतिम लोस

उन्होंने कहा, ‘‘आरक्षण काफी नहीं है। आदिवासी समुदाय की उन्नति के लिए ठोस कदम उठाये जाने चाहिए। हमें भीख नहीं, अधिकार चाहिए। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि हमारा उद्धार हो।’’

वहीं, भाजपा के गुमान सिंह दामोर ने कहा कि आदिवासियों के कल्याण के लिए सबसे ज्यादा भाजपा ने सोचा है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का सबसे ज्यादा फायदा आदिवासियों को हुआ है।

दामोर ने धर्मांतरण का जिक्र करते हुए कहा कि इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि जनजातीय संस्कृति नष्ट हो रही है, इसलिए जरूरी है कि धर्मांतरण को रोक जाए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने दूसरा धर्म अपना लिया है, उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर कर दिया जाना चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संविधान की पांचवीं अनुसूची में शामिल क्षेत्रों की जमीन उद्योगपतियों को नहीं दी जाए।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल ने कहा कि जाट समुदाय के आरक्षण की मांग सरकार को स्वीकार करनी चाहिए।

निर्दलीय नवनीत राणा ने कहा कि सरकारी योजनाओं के पैसे सीधे आदिवासियों के खाते में भेजने चाहिए।

आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि सरकार को अनुसूचित जाति-जनजाति से जुड़े अलग-अलग विधेयक लाने की बजाय एक समग्र विधेयक लाना चाहिए।

लोकसभा में बसपा के नेता गिरीश चंद्र ने कहा कि सरकार को आरक्षण की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि देश में जनजातीय समुदाय के बीच गरीबी और भुखमरी के जो हालात हैं, उससे उनकी दुर्दशा का पता चलता है।

उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में आदिवासी बच्चों के लिए एकलव्य स्कूलों की संख्या बढ़ाने की मांग की।

चौधरी ने कहा कि संसद की एक समिति के अनुसार, बिहार, मेघालय और जम्मू कश्मीर में मार्च 2021 तक कोई एकलव्य स्कूल संचालित नहीं था। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि आदिवासी समुदाय को शिक्षा के अधिकार नहीं मिल रहे।

उन्होंने पूछा कि सरकार ने ‘वन के अधिकार’ के तहत कितने आदिवासियों को जमीन के अधिकार दिये हैं।

द्रमुक के डी रविकुमार और कुछ अन्य सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया।

हक

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