देश की खबरें | शीर्ष अदालत ने ‘जादू टोना’ के शक में महिला की हत्या के जुर्म में दो लोगों की उम्रकैद को बरकरार रखा

नयी दिल्ली, 13 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में "जादू टोना" करने पर 1993 में एक महिला की हत्या के मामले में दो लोगों की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है।

शीर्ष अदालत ने दोषियों की इस दलील को खारिज कर दिया कि महिला की हत्या करने का उनका कोई इरादा नहीं था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि "ठोस सबूतों" को देखने के बाद और गवाहों के बयान एवं पेश किए गए दस्तावेजी सबूतों को देखते हुए उसकी राय है कि निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराने और आजीवन कारावास की सजा सुनाने में कोई गलती नहीं की है।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उनकी दोषसिद्धि और सजा की सही पुष्टि की है।

पीठ उच्च न्यायालय के जुलाई 2010 के फैसले के खिलाफ भक्तु गोराईं और बंधु गोराईं की अपील पर सुनवाई कर रही थी।

दोनों अपीलकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि उनका महिला की हत्या करने का कोई इरादा नहीं था और वे केवल उसे भविष्य में "जादू टोना" में शामिल होने से रोकने के लिए सबक सिखाना चाहते थे।

पीठ ने कहा कि यह दलील तथ्यों पर आधारित नहीं है क्योंकि घटना से एक दिन पहले दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था जिसमें सभी पांच आरोपी उपस्थित थे।

पीठ ने अपील खारिज करते हुए कहा कि तथ्य यह है कि आरोपी अगली सुबह एकत्र हुए थे और वे घातक हथियार से लैस थे तथा उन्होंने पीड़िता को घेर लिया था जो यह निष्कर्ष निकालने के लिए "पर्याप्त संकेत" है कि उन्होंने सुनियोजित तरीके से ऐसा किया था।

उसने कहा, ''इस प्रकार, यह दलील कि उनका कोई साझा इरादा नहीं था, पूरी तरह से खारिज की जाती है।''

पीठ ने कहा कि सितंबर 1993 में पश्चिम बंगाल के पुरुलिया के एक थाने में मृतका के बड़े बेटे ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पीड़िता को पांच आरोपियों ने घेर लिया था, जिन्होंने उसके साथ मारपीट की और पीड़िता की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

पीठ ने कहा कि मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए तीन अन्य दोषियों द्वारा दायर अपील को शीर्ष अदालत ने पहले खारिज कर दिया था।

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