देश की खबरें | तेंदुलकर को गलत आउट देना ’मानवीय गलती’ : बकनर

नयी दिल्ली, 21 जून सचिन तेंदुलकर को दो अवसरों पर महत्वपूर्ण मौके पर आउट देने के कारण भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के निशाने पर रहे पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर स्टीव बकनर ने इसे ‘मानवीय गलती’ करार दिया और कहा कि निर्णय समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) के कारण अंपायरिंग में सुधार हुआ है।

वेस्टइंडीज के 74 वर्षीय अंपायर बकनर 11 साल पहले संन्यास ले चुके हैं लेकिन उन्हें अब भी तेंदुलकर को दो अवसरों पर गलत आउट देने की घटना याद है। उन्होंने 2003 में ब्रिस्बेन में आस्ट्रेलिया के जैसन गिलस्पी की विकेटों के काफी ऊपर से जा रही गेंद पर पगबाधा आउट दे दिया था। इसके दो साल बाद कोलकाता में उन्होंने तेंदुलकर को पाकिस्तान के खिलाफ अब्दुल रज्जाक की गेंद पर विकेट के पीछे कैच आउट दिया था जबकि गेंद उनके बल्ले पर नहीं लगी थी।

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बकनर ने बारबाडोस में मैसन एवं गेस्ट रेडियो कार्यक्रम में कहा, ‘‘तेंदुलकर को दो भिन्न अवसरों पर गलत आउट दिया गया। मुझे नहीं लगता कि कोई भी अंपायर गलत फैसला देना चाहेगा। ये चीजें उसके साथ जुड़ जाती हैं और इससे उसका करियर खतरे में पड़ सकता है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह मानवीय गलती है। एक बार आस्ट्रेलिया में मैंने उसे (तेंदुलकर) को पगबाधा आउट दे दिया था जबकि गेंद विकेट के ऊपर से जा रही थी। दूसरी बार भारत में विकेट के पीछे कैच आउट दिया। गेंद बल्ले के पास से गुजरी लेकिन उसने बल्ला स्पर्श नहीं किया था। ’’

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कुल 128 टेस्ट और 181 वनडे में अंपायरिंग करने वाले बकनर ने कहा कि ईडन गार्डन्स में दर्शकों के शोर के कारण वह तब गेंद के बल्ले को स्पर्श करने की आवाज नहीं सुन पाये थे और उन्होंने गलत अनुमान लगा दिया था।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन वह मैच ईडन गार्डन्स पर था और जब ईडन में मैच हो और भारत खेल रहा हो तो आपको कुछ नहीं सुनाई देता। क्योंकि एक लाख दर्शक शोर मचा रहे होते हैं। ये गलतियां हैं और मैं इनसे नाखुश था। इंसान ही गलतियां करता है और उन्हें स्वीकार करना जिंदगी का हिस्सा है। ’’

बकनर ने कहा कि डीआरएस के कारण अंपायरिंग में सुधार हुआ है और उन्होंने इस प्रणाली का विरोध करने वाले अंपायरों से फिर से सोचने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि इससे आत्मविश्वास डगमगाएगा लेकिन मैं इतना जानता हूं कि इससे अंपायरिंग में सुधार हो रहा है। जो अपांयर इस प्रणाली की मौजूदगी का आनंद नहीं उठा पा रहे हैं, मुझे आशा है कि वे इस पर दोबारा विचार करेंगे। ’’

बकनर ने कहा, ‘‘अगर अब आप कोई गलती करते हैं तो उसे मैदान पर ही सुधारा जा सकता है। जब मैं अंपायरिंग करता था तब अगर मैंने किसी बल्लेबाज को गलत आउट दे दिया तो यह अहसास की मैंने गलती की है आपको कचोटती है। आपको उस बारे में सोचकर नींद नहीं आती है। अब आप को जल्दी नींद आ सकती है क्योंकि आखिर में सही फैसला दिया गया। ’’

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