मध्यप्रदेश में फंसे हजारों प्रवासी मजदूर, विशेष ट्रेन के लिए रेलवे को राज्य सरकारों के अनुरोध का इंतजार
कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण देशभर में लागू लॉकडाउन के बीच अपने मूल निवास स्थानों के लिये रवाना हुए हजारों प्रवासी श्रमिक पश्चिमी मध्यप्रदेश में फंस गये हैं. लेकिन ये रेलगाड़ियां चलाने के लिये रेलवे को मध्यप्रदेश या प्रवासी श्रमिकों के गृहप्रदेश की सरकार की तरफ से कोई औपचारिक अनुरोध अब तक प्राप्त नहीं हुआ है.
इंदौर, 4 मई: कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रकोप के कारण देशभर में लागू लॉकडाउन के बीच अपने मूल निवास स्थानों के लिये रवाना हुए हजारों प्रवासी श्रमिक पश्चिमी मध्यप्रदेश में फंस गये हैं. रोजगार छिन जाने की चिंताओं, दर-बदर होने के दर्द और घर वापसी की अनिश्चितताओं से घिरे इन लोगों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है.
अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि पश्चिमी मध्यप्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर फंसे इन प्रवासी मजदूरों में सबसे बड़ी तादाद पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से पलायन करने वाले अलग-अलग राज्यों के मजदूरों की है जहां कोरोना वायरस ने कहर बरपा रखा है. इनमें से ज्यादातर श्रमिक मुंबई से आगरा को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-तीन के जरिये अपने मूल ठिकानों की ओर रवाना हुए थे.
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लेकिन मध्यप्रदेश की सीमा में प्रवेश के बाद आगे बढ़ने से रोक दिये गये. उन्होंने बताया कि बीच रास्ते में फंसे इन मजदूरों में उत्तरप्रदेश के मूल निवासियों का बाहुल्य है. इनमें से कई मजदूर किसी तरह चारपहिया वाहन का जुगाड़ कर अपने गृहप्रदेश के लिये रवाना हुए थे, तो कई लोग मोटरसाइकिलों और साइकिलों से निकल पड़े थे.
फंसे मजदूरों में ऐसे लोगों की तादाद भी कम नहीं है जो चिलचिलाती गर्मी के बीच अपने परिवार के साथ सैकड़ों किलोमीटर का मुश्किल सफर तय करने के लिये पैदल ही चल पड़े थे. अधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के बिजासन घाट में पुलिस के रोके जाने पर भड़के सैकड़ों प्रवासी मजदूर पिछले चार दिन में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-तीन पर चक्काजाम और पथराव की घटनाओं को भी अंजाम दे चुके हैं.
महाराष्ट्र सीमा पर स्थित इस पहाड़ी इलाके में हर रोज प्रवासी मजदूरों का बड़ा जमघट देखा जा रहा है. चश्मदीदों के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-तीन पर बड़वानी के बिजासन घाट से इंदौर शहर के करीब 170 किलोमीटर के रास्ते में भी सैकड़ों प्रवासी मजदूरों को अपने गृहप्रदेश पहुंचने की जद्दोजहद में जुटा देखा जा सकता है. इस बीच, मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर और इसके आस-पास के इलाकों में भी सैकड़ों प्रवासी श्रमिक फंसे हैं.
वे जल्द से जल्द अपने गृहप्रदेश या मध्यप्रदेश के गृह जिले पहुंचना चाहते हैं. इनमें इंदौर के साथ ही नजदीकी पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की बड़ी तादाद है जहां कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते अधिकांश कल-कारखाने ठप पड़े हैं. फिलहाल इन मजदूरों को आश्रय स्थलों में रखा गया है. इस बीच, पश्चिम रेलवे के रतलाम रेल मंडल का कहना है कि उसने प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह प्रदेश छोड़ने के लिये इंदौर से विशेष ट्रेनें चलाने की तैयारियां अपने स्तर पर पूरी कर ली हैं.
लेकिन ये रेलगाड़ियां चलाने के लिये रेलवे को मध्यप्रदेश या प्रवासी श्रमिकों के गृहप्रदेश की सरकार की तरफ से कोई औपचारिक अनुरोध अब तक प्राप्त नहीं हुआ है. रतलाम रेल मंडल के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी जितेंद्र कुमार जयंत ने बताया, "अगर संबंधित राज्य सरकारों द्वारा रेलवे से औपचारिक अनुरोध किया जाता है, तो हम कोचों में एकदूसरे से दूरी बनाये रखने के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए हर विशेष रेलगाड़ी के जरिये करीब 1,200 प्रवासी श्रमिकों को उनके गृहप्रदेश छोड़ सकते हैं."
जयंत ने बताया कि रेलवे द्वारा श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने से पहले दो राज्यों के बीच यह सहमति बननी जरूरी होती है कि दोनों सूबे प्रवासी मजदूरों की रवानगी और आमद की व्यवस्थाओं के लिये तैयार हैं.
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(The above story first appeared on LatestLY on May 04, 2020 04:19 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

