नयी दिल्ली, 28 जुलाई जापान ने शुक्रवार को कहा कि यूक्रेन में युद्ध पर जी-7 देशों की स्थिति समान रहेगी और समूह के आगामी शिखर सम्मेलन में अपनाए जाने वाले नेताओं के घोषणापत्र में संकट का उल्लेख करने संबंधी विषय पर आम सहमति बनाना जी-20 की भारतीय अध्यक्षता पर निर्भर है।
जी-20 के वर्तमान अध्यक्ष भारत को पश्चिमी देशों और रूस-चीन के बीच तीव्र मतभेदों के मद्देनजर इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने की कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
जापान के विदेश मंत्रालय में उप प्रेस सचिव युकिको ओकानो ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि बृहस्पतिवार शाम जापानी विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी और उनके भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर के बीच बातचीत में यूक्रेन संकट पर चर्चा हुई।
हयाशी के साथ भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आई ओकानो ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि यूक्रेन पर जी-7 का रुख नहीं बदलेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमारी स्थिति जी-7 देशों के रूप में समान रहेगी, चाहे हम किसी भी मंच पर यूक्रेन से संबंधित अपनी चिंताओं और आपत्तियों को व्यक्त करें।’’
ओकानो ने कहा, ‘‘जब संयुक्त विज्ञप्ति की बात आती है, तो यह वास्तव में अध्यक्षता पर निर्भर करता है कि आम सहमति तक कैसे पहुंचा जाए। इसलिए मैं आगे के रास्ते पर टिप्पणी नहीं करना पसंद करूंगी। यह जी-20 की भारतीय अध्यक्षता पर निर्भर है।’’
जापान की अध्यक्षता में मई में हिरोशिमा में जी-7 शिखर सम्मेलन हुआ था।
शिखर सम्मेलन में, जी-7 नेताओं ने यूक्रेन पर रूस के ‘‘अवैध, अनुचित और अकारण’’ हमले के खिलाफ एक साथ खड़े होने का संकल्प लिया था और मॉस्को पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की थी।
भारतीय वार्ताकारों को यूक्रेन से संबंधित विषय पर आम सहमति बनने का भरोसा है।
यूक्रेन संघर्ष पर हयाशी और जयशंकर के बीच चर्चा के बारे में पूछे जाने पर ओकानो ने विवरण साझा करने से इनकार किया।
उन्होंने कहा कि दोनों देश ‘‘मौलिक विचार’’ साझा करते हैं कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की जानी चाहिए तथा यथास्थिति को बदलने के लिए बल का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है।
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