देश की खबरें | 'बाउंसर' शब्द का इस्तेमाल जनता के मन में भय और आतंक पैदा करने के लिए किया गया: अदालत

चंडीगढ़, 21 मई निजी सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अपने कर्मचारियों के लिए ‘‘बाउंसर’’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा है कि इसका उद्देश्य ‘‘जनता के मन में भय, चिंता और आतंक’’ पैदा करना है जो किसी भी सभ्य व्यवस्था में ‘‘अनुचित’’ है।

न्यायालय ने यह भी कहा कि सुरक्षा एजेंसी या सुरक्षा गार्ड की सेवाएं लेने का प्राथमिक कारण सुरक्षित स्थान सुनिश्चित करना है, लेकिन जब ये नियोक्ता या कर्मचारी स्वयं को संविधान से बाहर का अधिकारी मानकर ‘‘अपराधी’’ बन जाते हैं और धमकी तथा अपने क्रूर बल का हथियार के रूप में इस्तेमाल करने लगते हैं, तो यह समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।

उच्च न्यायालय एक निजी सुरक्षा एजेंसी संचालित करने वाले व्यक्ति द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनूप चिटकारा की एकल पीठ ने कहा कि अदालत के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात याचिकाकर्ता द्वारा संचालित सुरक्षा एजेंसी के नाम में ‘‘बाउंसर’’ शब्द का प्रयोग है।

पीठ ने एक ‘‘चिंताजनक प्रवृत्ति’’ का उल्लेख किया, जिसमें नियोक्ताओं और कर्मचारियों के एक विशेष वर्ग ने एक साधारण नौकरी विवरण ‘‘बाउंसर’’ की आड़ में ‘‘आतंकित करने वाली और धमकाने वाली भूमिका’’ अपनानी शुरू कर दी है।

अदालत ने कहा कि सरकार को भी पता है कि सुरक्षा एजेंसियां ​​अपनी ताकत दिखाने और अपना प्रभाव दिखाने के लिए किस तरह से ‘‘बाउंसर’’ शब्द का इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन वह इस तरह के मुद्दे के प्रति ‘‘उदासीन और असंवेदनशील’’ बने रहना पसंद कर रही है।

अदालत ने शब्दकोश में पाई जाने वाली ‘‘बाउंसर’’ शब्द की परि का भी हवाला दिया।

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