ख्रेव (जम्मू-कश्मीर), दो जुलाई जम्मू-कश्मीर में पुलवामा जिले के दूरदराज के गांव ख्रेव स्थित ज्वाला माता मंदिर में हर साल की तरह इस साल भी सोमवार को आषाढ़ी चतुदर्शी के मौके पर धार्मिक सद्भावना की छटा तब देखने को मिली जब हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ देवी का प्रकटोत्सव मनाने के लिए एकत्र हुए।
यहां आयोजित उत्सव में शामिल होने आए कश्मीरी पंडित महाराज कृष्ण रैना ने कहा, ‘‘आज आषाढ़ी चतुदर्शी है। यह आम तौर पर जुलाई में आती है। यह माता ज्वाला का प्रकटोत्सव है और पूरे देश से लोग यहां आते हैं। केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी यहां आते हैं। हम मिलकर पूजा-अर्चना करते हैं।’’
जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर से 25 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में हिंदू-मुस्लिम भाईचारा हालांकि नया नहीं है लेकिन दोनों समुदाय के लोगों ने कश्मीर में सद्भावना, शांति और भाईचारे की वापसी के लिए प्रार्थना की।
उत्सव में शामिल एक महिला कश्मीरी पंडित श्रद्धालु ने कहा, ‘‘कश्मीर और बाहर से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। हम हाथ जोड़कर देवी मां से क्षेत्र में शांति बहाली की प्रार्थना कर रहे हैं, ताकि हिंदू और मुस्लिम पहले की तरह एक साथ रह सकें।’’
स्थानीय निवासी रईस अहमद ने कहा कि कश्मीरी पंडित और कश्मीरी मुस्लिम एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों समुदायों को अलग-अलग कर पहचान नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीरी सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जाने जाते हैं और यह जरूरी है कि वे (पंडित) हमारे साथ रहें तथा हम उनके साथ रहें। हम एक-दूसरे के पूरक हैं। हमारी पहचान अलग नहीं की जा सकती।’’
इस उत्सव के स्थानीय स्तर पर महत्व का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि दक्षिण कश्मीर से लोकसभा सदस्य और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता हसनैन मसूदी भी रविवार की सुबह उत्सव में शामिल होने आए लोगों में शामिल थे।
मसूदी ने कहा, ‘‘यह महोत्सव हमारे क्षेत्र के लिए एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है। यह हिंदू-मुस्लिम सौहार्द का प्रतीक है।’’
मंदिर परिसर में उत्सव के लिए लंगर लगाया गया जिसमें श्रद्धालुओं को बिना किसी भेदभाव के भोजन कराया गया।
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