देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने ‘आप’ के शासनकाल में केंद्र, उपराज्यपाल पर दर्ज मामले वापस लेने की अनुमति दी

नयी दिल्ली, 23 मई उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली सरकार को राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं पर नियंत्रण सहित अन्य मुद्दों को लेकर पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की ओर से केंद्र और उपराज्यपाल के खिलाफ दायर सात मामलों को शुक्रवार को वापस लेने की अनुमति दे दी।

प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलों पर गौर किया और याचिका को स्वीकार कर लिया।

सुनवाई के दौरान एक वकील ने ‘आप’ सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों के शुल्क का भुगतान न होने का मुद्दा उठाया। इस पर भाटी ने पीठ को आश्वासन दिया कि सभी लंबित शुल्क का भुगतान कर दिया जाएगा।

भाजपा सरकार ने 22 मई को न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ से पूर्ववर्ती ‘आप’ सरकार की ओर से केंद्र और उपराज्यपाल के खिलाफ दायर सात मामलों को वापस लेने का अनुरोध किया था।

भाटी ने याचिका का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत में लंबित सात मामलों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, यमुना नदी सफाई सहित कई समितियों में उपराज्यपाल के अधिकारों और विभिन्न अधिनियमों एवं अध्यादेशों की वैधता को चुनौती दी गई है।

उन्होंने कहा, “इन मामलों से अब अदालत को परेशान नहीं करना चाहिए।”

राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं पर नियंत्रण सहित अन्य मामलों को लेकर दिल्ली की पूर्ववर्ती ‘आप’ सरकार और उपराज्यपाल के बीच तीखी कानूनी लड़ाई देखने को मिली थी।

जुलाई 2023 में शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) (संशोधन) अधिनियम, 2023 को चुनौती देने वाली तत्कालीन ‘आप’ सरकार की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था, जिसके तहत दिल्ली में ग्रुप-ए अधिकारियों की तैनाती और तबादले के लिए एक प्राधिकरण बनाया गया था।

यह अधिनियम उच्चतम न्यायालय द्वारा दिल्ली में पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि को छोड़कर सभी सेवाओं का नियंत्रण निर्वाचित सरकार को सौंपने के एक हफ्ते बाद आया था।

पूर्ववर्ती ‘आप’ सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 19 जनवरी 2023 के आदेश को भी चुनौती दी थी, जिसके तहत उपराज्यपाल को यमुना पुनरुद्धार से जुड़े मुद्दों से निपटने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति का नेतृत्व करने को कहा गया था।

शीर्ष अदालत ने जुलाई 2023 में एनजीटी के इस आदेश पर रोक लगा दी थी।

जीएनसीटीडी के वित्त विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-2025 के लिए दिल्ली जल बोर्ड के वास्ते स्वीकृत धनराशि को कथित तौर पर न जारी करने और दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी पूर्ववर्ती ‘आप’ सरकार और उपराज्यपाल आमने-सामने थे।

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