देश की खबरें | जलवायु कार्रवाई में भारत-ब्राजील की भूमिका अहम: सीओपी30 अध्यक्ष

नयी दिल्ली, 20 मार्च संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस साल आयोजित किये जा रहे जलवायु सम्मेलन (सीओपी30) के अध्यक्ष आंद्रे कोरेया डो लागो ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ विशेष रूप से भारत और ब्राजील जैसे देश जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व करने के लिए एक अद्वितीय स्थिति में हैं, क्योंकि विकसित देश रास्ता दिखाने में विफल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत और ब्राजील जैसे देशों के पास मजबूत संस्थान और वैज्ञानिक विशेषज्ञता है और साथ ही बड़ी संवेदनशील आबादी भी है।

द्विपक्षीय वार्ता के इस समय भारत में मौजूद कोरेया डो लागो ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ब्राजील का लक्ष्य जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र मसौदा संधि (यूएनएफसीसीसी) और पेरिस समझौते से आगे जाकर संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलनों में की गई प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना है, क्योंकि कई वित्तीय और शासन संस्थान संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के बाहर काम करते हैं।

भारत में ब्राजील के पूर्व राजदूत कोरेया डो लागो ने वैश्विक जलवायु नेतृत्व में ‘ग्लोबल नॉर्थ’ (विकसित देशों के संदर्भ में)से ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों के संदर्भ में) की ओर बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा कि अमेरिका में ‘‘इस विषय को लेकर अनिच्छा’’ है, जबकि ‘‘यूरोपीय देशों की प्राथमिकताएं अब रक्षा के संबंध में हैं’’ और ‘‘अन्य देश प्राथमिकताएं पेश कर रहे हैं’’।

उन्होंने कहा, ‘‘इस चरण में ‘ग्लोबल साउथ’ को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है... ग्लोबल साउथ ने नियमों की इस बहुपक्षीय प्रक्रिया में बहुत ही रचनात्मक तरीके से भाग लिया है। हमने समझौतों का पालन किया, बहुत चर्चा की, लेकिन रचनात्मक बने रहे। हमने पेरिस समझौते को स्वीकार किया, आदि। लेकिन (ग्लोबल)नॉर्थ का हिस्सा, जिसमें वित्तीय सहायता और उत्सर्जन में कमी को तेज करना शामिल था, योजना के अनुसार नहीं हुआ है।’’

सीओपी30 अध्यक्ष ने कहा, ‘‘इसलिए, ग्लोबल साउथ के लिए एक नया स्थान है, क्योंकि भारत या ब्राजील जैसे देशों के पास उन्नत विज्ञान, बहुत मजबूत संस्थान और साथ ही आबादी के कुछ हिस्से बहुत गरीब हैं।’’

उन्होंने कहा कि ब्राजील और भारत ‘ब्रिक्स’ (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का समूह) और बेसिक (ब्राजील , दक्षिण अफ्रीका , भारत और चीन का समूह) जैसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समूहों में मिलकर ‘‘साउथ टू साउथ’’ एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।

कोरेया डो लागो से जब पूछा गया कि क्या भारत जलवायु कार्रवाई के संबंध में ब्राजील की भावना से सहमत है, तो उन्होंने कहा कि भारत के पास मजबूत वैज्ञानिक संस्थान हैं और वह ‘‘जलवायु परिवर्तन के खतरे के प्रति बहुत सचेत और मुखर है।’’

उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने सीओपी33 की मेजबानी की पेशकश की है और दोनों देशों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि ‘ग्लोबल साउथ’ की स्थिति मजबूत और सुसंगत हो।

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