ताजा खबरें | दिल्ली से संबंधित विधेयक का मकसद राष्ट्रीय राजधानी के लोगों के हितों की रक्षा करना : शाह

नयी दिल्ली, सात अगस्त गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि दिल्ली में अधिकारियों के तबादले एवं तैनाती से जुड़े अध्यादेश के स्थान पर लाये गये विधेयक का मकसद राष्ट्रीय राजधानी के लोगों के हितों की रक्षा करना है, आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के हितों को हथियाना नहीं।

उच्च सदन में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2023 पर हुई लंबी चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री शाह ने कहा है कि विधेयक का उद्देश्य दिल्ली में ‘‘भ्रष्टाचार विहीन और लोकाभिमुख शासन’’ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में जो व्यवस्था थी, उसमें इस विधेयक के माध्यम से किंचित मात्र भी परिवर्तन नहीं हो रहा है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली कई मायनों में सभी राज्यों से अलग प्रदेश है क्योंकि यहां संसद, कई संस्थाएं, उच्चतम न्यायालय हैं वहीं कई राष्ट्राध्यक्ष यहां चर्चा करने आते हैं, इसीलिए इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह विधानसभा के साथ सीमित अधिकार वाला केंद्र शासित प्रदेश है।

शाह ने कहा कि विधायक का चुनाव या मुख्यमंत्री बनने वाले व्यक्ति को इसके सीमित अधिकारों के बारे में पता होना चाहिए। उन्होंने दिल्ली के स्वतंत्रता पूर्व एवं स्वतंत्रता पश्चात इतिहास का भी उल्लेख किया।

उन्होंने राजद सदस्य मनोज झा से कहा कि वह सदन को यह समझा दें कि क्या दिल्ली अभी केंद्र शासित प्रदेश नही है? उन्होंने कहा कि दिल्ली में जिस तरह के बदलाव हो सकते हैं, वे अन्य राज्यों में नहीं हो सकते हैं।

गृह मंत्री ने कहा कि 1991 से 2015 तक दिल्ली में विभिन्न दलों की सरकारें रहीं और इस दौरान अधिकारियों के तबादले एवं पदोन्नति इसी तरह होते रहे। उन्होंने कहा कि उस दौरान केंद्र एवं राज्य में कभी भाजपा की सरकार थी और कभी कांग्रेस की किंतु कभी इनके बीच टकराव नहीं हुआ।

उन्होंने इस आरोप को गलत बताया कि केंद्र सरकार अपने हाथ में ‘‘पावर’’ लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि देश की 130 करोड़ जनता ने उन्हें चुनकर भेजा है, उन्हें ‘‘पावर’’ दी है। उन्होंने कहा कि शब्दकोश के बड़े बड़े अंग्रेजी शब्द कह देने से सत्य नहीं बदल जाएगा।

शाह ने कहा कि दिल्ली में अराजकता फैलाने का काम शुरू हो गया है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय का उल्लेख किया जिसमें सेवाओं के मामले में दिल्ली सरकार का अधिकार माना गया।

गृह मंत्री ने कहा कि संविधान के तहत दिल्ली के किसी भी विषय में कानून बनाने का संसद को अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद को दिल्ली विधानसभा द्वारा पारित किसी भी कानून को संशोधित करने या निरस्त करने का अधिकार दिया है। शाह ने कहा कि यह संविधान संशोधन उनकी सरकार नहीं कांग्रेस सरकार लेकर आयी थी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस आम आदमी पार्टी को संतुष्ट करने के लिए अपने ही लाये गये कानून का आज विरोध कर रहे हैं।

शाह ने कहा कि अदालत के फैसले की अवमानना तब होती है जब अदालत ने स्थगनादेश दिया हो। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि दिल्ली के बारे में संसद कानून बना सकती है।

उन्होंने कहा कि अदालत के फैसलों को बदलने के लिए कई बार संविधान में संशोधन किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम इमर्जेंसी लगाने के लिए संविधान में संशोधन लेकर नहीं आये हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम यह विधेयक किसी पूर्व प्रधानमंत्री की सदस्यता को बचाने के लिए नहीं लाये हैं। हम संविधान की भावना को बचाने के लिए यह विधेयक लाये हैं।’’

उन्होंने कहा कि आपात काल के दौरान तीन लाख राजनीतिक नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के विरोध में अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के संपादकीय को खाली छोड़ दिया गया था।

गृह मंत्री ने अध्यादेश के समय के बारे में बताया कि उच्चतम न्यायालय में अवकाशकालीन पीठ होती है जो स्थगनादेश दे सकती है। उन्होंने कहा कि अध्यादेश के खिलाफ स्थगनादेश मांगा गया था किंतु उच्चतम न्यायालय ने नहीं दिया था।

शाह ने कहा कि सरकार दिल्ली की जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए यह अध्यादेश लायी और इसी लिए इसमें जल्दबाजी की गयी। उन्होंने कहा कि 11 मई को उच्चतम न्यायालय का निर्णय आया। उन्होंने कहा कि उसी दिल्ली सरकार ने तबादले शुरू कर दिये और सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा भी कर दी गयी।

उन्होंने कहा कि सतर्कता विभाग के अधिकारियों से कहा गया कि वे सीधे मंत्री को रिपोर्ट करें। उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली सरकार ने केवल सतर्कता विभाग को ही क्यों निशाना बनाया, अन्य विभागों को क्यों नहीं।

शाह ने कहा कि इसका कारण था कि आबकारी घोटाले की फाइलें सतर्कता विभाग में थीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आवास की मरम्मत के लिए आवंटित की गयी राशि से छह गुना अधिक राशि खर्च करने संबंधित फाइल भी सतर्कता विभाग के पास थी।

उन्होंने कहा कि दो बीज कंपनियों के खिलाफ जांच की फाइल भी सतर्कता विभाग के पास थी। उन्होंने कहा कि यह अध्यादेश नहीं लाया जाता तो इन फाइलों को गुम करने का एक नया घोटाला हो जाता ।

गृह मंत्री ने कहा कि विधायिका संविधान के नियम के अनुसार चलती है। उन्होंने आप सरकार पर आरोप लगाया कि दिल्ली विधानसभा में सत्र का सत्रावसान ही नहीं होता है। उन्होंने कहा कि 2022 में दिल्ली सरकार की कुल छह कैबिनेट बैठक हुई जिनमें तीन बजट के बारे में थीं और बाकी एक बिजली वितरण कंपनी को सहायता देने के बारे में बुलायी गयी थी।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के पास तबादला एवं पदोन्नति के मामले में उच्चतम न्यायालय के पास जाने का समय है किंतु 5जी को लागू करने के मामले में केंद्र सरकार की सहायता करने के लिए समय नहीं है।

गृह मंत्री ने कहा कि विधेयक के अनुसार तबादले एवं पदोन्नति के मामले में दिल्ली विधानसभा भी कानून बना सकती है किंतु यह केंद्र सरकार के अधिनियम के विरूद्ध नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उन्होंने आज तक नहीं देखा कि मंत्री के हस्ताक्षर से कैबिनेट नोट भेजा जाता हो। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार नियमों को मानती ही नहीं है इसलिए इन नियमों को कानून में डालना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि यह नियम इस सरकार ने नहीं कांग्रेस सरकार ने बनाये थे। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस में अंतरात्मा है तो वह मौजूदा विधेयक का समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि वह जानते हैं कि कांग्रेस कभी नहीं समर्थन करेगी क्योंकि गठबंधन का मामला है।

शाह ने कहा कि जैसे ही यह विधेयक संसद से पारित होगा, आम आदमी पार्टी कांग्रेस का छोड़ देगी। उन्होंने तृणमूल एवं जनता दल (यू) का नाम लेते हुए कहा कि इन पार्टियों का जन्म ही कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी एवं राजद के विरोध में हुआ था।

उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत की एक टिप्पणी का उल्लेख किया कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कई देशों के राष्ट्रपति एवं राष्ट्राध्यक्ष सम्मान करते हैं और राउत को भी प्रधानमंत्री का सम्मान करना चाहिए।

राउत ने कहा था कि प्रधानमंत्री को विदेश में जो सम्मान मिलता है तो वह भारत के प्रधानमंत्री होने के कारण है, उनके व्यक्तित्व के कारण नहीं।

उन्होंने कम्युनिस्ट सदस्यों द्वारा भाजपा के आजादी के आंदोलन में भाग नहीं लेने की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उनकी पार्टी का गठन ही 1950 में हुआ था तो वह कैसे आजादी के आंदोलन में भाग ले सकती थी उन्होंने कहा कि उनके नेता श्यामाप्रसाद मुखर्जी के कारण ही बंगाल और जम्मू कश्मीर आज भारत में है।

उन्होंने कहा कि नागपुर तो भारत में आता है किंतु कम्युनिस्ट तो रूस एवं चीन से प्रेरणा लेते रहे और उन्हें देशभक्ति की चर्चा नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने विपक्ष को 11 अगस्त को मणिपुर पर चर्चा के लिए चुनौती देते हुए कहा कि वह मतदान के प्रावधान वाले नियम के तहत चर्चा चाहती है तो उसे आज ही इस विधेयक को मतदान में हराकर अपनी संख्या दिखा देनी चाहिए।

शाह ने कहा कि 8,9 एवं 10 अगस्त को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के कारण उच्च सदन में मणिपुर मुद्दे पर चर्चा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि विपक्ष को 11 अगस्त को मणिपुर पर चर्चा करनी चाहिए और उसे चर्चा से नहीं भागना चाहिए।

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