देश की खबरें | पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन ने कानून बनाने में देश की जनता की प्रधानता में विश्वास जताया

जयपुर, 12 जनवरी देश की विधायी संस्थाओं के अध्यक्षों के सबसे बड़े समागम ‘अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन’ ने कानून बनाने में देश की जनता की प्रधानता में विश्वास और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत में अपनी आस्था व्यक्त की है।

इसके साथ ही सम्मेलन ने राज्य के सभी अंगों से देश के संविधान में निर्दिष्ट संवैधानिक सीमाओं का सम्मान करने का आह्वान किया है।

पीठासीन अधिकारियों का 83वां सम्मेलन बृहस्पतिवार को जयपुर में संपन्न हुआ। सम्मेलन में नौ प्रस्तावित पारित किए गए जिनमें से एक प्रस्ताव कानून बनाने में ‘‘भारत की जनता की प्रधानता में अपना पूर्ण विश्वास व्यक्त करने’’ के संबंध में भी है।

समापन सत्र के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी ने संयुक्त प्रेस वार्ता में इस सम्‍मेलन में पारित किए गए नौ संकल्पों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

लोकसभा अध्‍यक्ष ने बताया कि पहला संकल्‍प भारत में आयोजित होने वाले जी-20 राष्ट्रों के समूह और संसद-20 की अध्यक्षता ग्रहण करने पर भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ के रूप में प्रस्तुत करने के बारे में पारित किया गया।

बिरला ने बताया कि शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत में आस्था से जुड़ा एक अन्‍य संकल्‍प पारित किया गया। इसके अनुसार, ‘‘सम्मेलन राष्ट्र के विधायी निकायों के माध्यम से कानून बनाने में भारत की जनता की प्रधानता में अपना पूर्ण विश्वास व्यक्त करता है और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत में अपनी आस्था व्यक्त करते हुए राज्य के सभी अंगों को हमारे संविधान में निर्दिष्ट संवैधानिक सीमाओं का सम्मान करने का आह्वान करता है।’’

इसके साथ ही, विधायी निकायों की कार्यवाही में सदस्यों की अधिक भागीदारी और आदर्श समरूप नियम प्रक्रियाएं बनाने का भी संकल्‍प पारित किया गया जिसके तहत असंसदीय आचरण पर प्रभावी नियंत्रण के वास्ते नियम प्रक्रियाओं में आचार संहिता को शामिल करने पर सहमति बनी।

सम्मेलन के दौरान एक और संकल्प यह भी लिया गया कि सभी राजनैतिक दल निर्णय लें कि विधानमंडलों की सभाओं में व्यवधान उत्पन्न न किया जाए।

बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों के सम्‍मेलन में विधानमंडलों में समिति प्रणाली को सशक्त करने और कार्यपालिका के कार्य की समीक्षा की सीमा बढ़ाने के लिए सभी विधायी निकायों से सार्थक कदम उठाने का आह्वान करने का संकल्‍प भी पारित किया गया।

उन्होंने कहा कि संघ और राज्य विधानमंडलों के कार्य प्रबंधन में वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त करने से संबंधित एक अन्‍य संकल्प के तहत लोकसभा अध्यक्ष को संबंधित राज्य सरकारों से विस्तृत विचार-विमर्श के लिए अधिकृत किया गया।

लोकसभा अध्‍यक्ष ने पत्रकारों को बताया कि सातवां संकल्‍प भारत में सभी विधायी निकायों के लिए ‘राष्ट्रीय डिजिटल ग्रिड’ के माध्‍यम से एक-दूसरे से जुड़ने हेतु कदम उठाने से संबंधित है। वार्षिक आधार पर एक उत्कृष्ट विधायिका पुरस्कार की शुरुआत करने का भी संकल्‍प लिया गया।

बिरला ने कहा कि नौवां संकल्‍प समाज के सभी वर्गों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं को संवैधानिक प्रावधानों तथा विधायी नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी देने के सभी संभव प्रयास करने से जुड़ा है।

पृथ्वी

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)