देश की खबरें | मोदी सरकार ‘नव-फासीवादी’ नहीं, इसके पहलू जरूर दिखते हैं: माकपा

नयी दिल्ली, 24 फरवरी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा है कि वह नरेन्द्र मोदी सरकार या भारतीय राज व्यवस्था (इंडियन स्टेट) को ‘‘नव-फासीवादी’’ नहीं मानती है, हालांकि इनमें ‘‘नव-फासीवादी’’ पहलुओं का प्रकटीकरण होता है।

वापमंथी पार्टी ने आगामी सम्मेलन के लिए राजनीतिक प्रस्ताव के मसौदे को लेकर अपनी प्रदेश इकाइयों को भेजे गए नोट में यह बात कही।

माकपा का इस नोट में उल्लेखित उसका यह पक्ष भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन जैसे अन्य वाम दलों के रुख से अलग है।

भाकपा का रुख है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार फासीवादी है, जबकि भाकपा (माले) ने भी कहा है कि एक ‘‘भारतीय फासीवाद’’ स्थापित हो गया है।

माकपा के नोट में कहा गया कि राजनीतिक प्रस्ताव में इस बात का उल्लेख है कि अगर भाजपा-आरएसएस से मुकाबला नहीं किया गया और उन्हें रोका नहीं गया तो देश के हिंदुत्व-कॉरपोरेट अधिनायकवाद के नव-फासीवाद की ओर बढ़ने के खतरा है।

साथ ही, इसने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी मोदी सरकार को ‘‘नव-फासीवादी’’ नहीं कह रही है।

नोट में कहा गया, ‘‘हम यह नहीं कह रहे हैं कि मोदी सरकार फासीवादी या नव-फासीवादी सरकार है। न ही हम भारतीय राज व्यवस्था को नव-फासीवादी व्यवस्था बता रहे हैं।’’

माकपा के राजनीतिक प्रस्ताव के मसौदे पर अप्रैल में तमिलनाडु के मदुरै में पार्टी की बैठक में चर्चा की जाएगी। इसे 17 जनवरी से 19 जनवरी तक कोलकाता में पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक में अनुमोदित किया गया था।

मसौदा प्रस्ताव में कहा गया कि मोदी सरकार के प्रतिनिधित्व वाली हिंदुत्व-कॉरपोरेट शासन की ताकतों और इसकी विरोधी धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक ताकतों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है।

इसमें कहा गया, ‘‘प्रतिक्रियावादी हिंदुत्व एजेंडे को लागू करने का प्रयास और विपक्ष तथा लोकतंत्र को दबाने के लिए सत्तावादी अभियान नव-फासीवादी के पहलुओं को प्रदर्शित करता है।’’

हक

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