पिछले वर्ष, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से इजराइल के कानूनी दायित्वों पर राय देने को कहा था, क्योंकि इजराइल ने गाजा को सहायता प्रदान करने वाली मुख्य संस्था- फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी पर प्रतिबंध लगा दिया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले का संयुक्त राष्ट्र और दुनिया भर में उसके मिशन पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
यह सुनवाई ऐसे समय हो रही है जब गाजा में मानवीय सहायता प्रणाली ध्वस्त होने के कगार पर है तथा युद्ध विराम के प्रयास गतिरोध में फंसे हुए हैं। इजराइल ने दो मार्च से ही खाद्यान्न, ईंधन, दवाइयां और अन्य मानवीय आपूर्तियों पर रोक लगा रही है।
इजराइल ने 18 मार्च को पुनः बमबारी भी शुरू कर दी, युद्ध विराम को तोड़ दिया, तथा क्षेत्र के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। उसने अपनी कार्रवाई को उचित ठहराते हुए दलील दी कि इसका उद्देश्य हमास पर अधिक बंधकों को रिहा करने के लिए दबाव डालना है।
इजराइल ने हमास के साथ युद्ध के तहत नागरिकों और सहायता कर्मचारियों को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोप से इनकार किया है, लेकिन वह सुनवाई में शामिल नहीं हुआ। इजराइल ने अदालत के विचारार्थ 38 पन्नों का लिखित जवाब प्रस्तुत किया।
सुनवाई मुख्य रूप से फलस्तीनियों को सहायता पहुंचाने पर केंद्रित थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के 15 न्यायाधीश विश्व निकाय की शक्तियों पर कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए अपनी राय दे सकते हैं।
ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के विशेषज्ञ माइक बेकर ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया, ‘‘न्यायालय के पास संयुक्त राष्ट्र की कानूनी सुरक्षा संबंधी प्रश्नों को स्पष्ट करने और उनका समाधान करने का अवसर है।’’
संयुक्त राष्ट्र न्यायालय द्वारा दी गई सलाह ‘गैर-बाध्यकारी’ होती है क्योंकि उन्हें नजरअंदाज करने पर कोई प्रत्यक्ष सजा नहीं दी जाती।
अदालत को अपनी राय देने में महीनों का समय लग सकता है।
एपी
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