वहीं, ओमान ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच कुछ प्रगति हुई है, लेकिन वह निर्णायक नहीं है।
अल-बुसैदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता जारी रहेगी।
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “ईरान-अमेरिका वार्ता का पांचवां दौर आज रोम में संपन्न हुआ, जिसमें कुछ प्रगति हुई, लेकिन वह निर्णायक नहीं है। हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में शेष मुद्दों को स्पष्ट कर दिया जाएगा, ताकि हम एक स्थायी और सम्मानजनक समझौते तक पहुंचने के साझा लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकें।”
वार्ता के बाद अरागची ने ईरानी सरकारी टेलीविजन को बताया कि अल-बुसैदी ने जो विचार प्रस्तुत किए हैं, उन्हें दोनों देशों की राजधानियों तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने कहा, “ये वार्ताएं इतनी जटिल हैं कि इन्हें दो या तीन बैठकों में सुलझाया नहीं जा सकता। मुझे उम्मीद है कि अगले एक या दो दौर में- खासतौर पर ईरान की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने के बाद- हम वार्ता की प्रगति को लेकर किसी समाधान पर पहुंच सकेंगे।’
उन्होंने कहा, “हम अभी वहां तक नहीं पहुंचे हैं, लेकिन हम हतोत्साहित भी नहीं हैं।”
ईरान का यूरेनियम संवर्धन दोनों देशों की वार्ता में मुख्य मुद्दा बनकर उभरा है।
वार्ता में अमेरिका का प्रतिनिधित्व पश्चिम एशिया में ट्रंप प्रशासन के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और माइकल एंटोन ने किया, जो विदेश विभाग में नीति नियोजन निदेशक हैं।
अल-बुसैदी इस वार्ता की मध्यस्थता कर रहे हैं। ओमान वार्ता में दोनों देशों का विश्वसनीय वार्ताकार रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार धमकी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के कार्यक्रम को लक्षित करते हुए हवाई हमला किया जा सकता है। वहीं, ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार से परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बढ़ सकते हैं।
यूएस डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी की एक नयी रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान निश्चित रूप से अभी परमाणु हथियारों का उत्पादन नहीं कर रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में अपनी गतिविधियों से वह उत्पादन के लिए बेहतर स्थिति में है।
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