देश की खबरें | भारत में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के जनक ने अपने संस्मरण को किताब की दी शक्ल

नयी दिल्ली, 23 दिसंबर भारत में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के जनक माने जाने वाले डॉ.तेथेमटोन एराच उदवाडिया ने अपने संस्मरणों को किताब की शक्ल दी है, जिसमें उन्होंने भारत में सर्जरी को लेकर विस्तार से राय रखी है। साथ ही उन्होंने डॉक्टरों को भी उपयोगी सलाह दी है।

डॉ.उदवाडिया की यह किताब ‘‘मोर देन जस्ट सर्जरी : लाइफ लेसन बेयोन्ड द ओटी’’ हाल में बाजार में आई है जिसे पेंगुइन रैंडम हाउस ने प्रकाशित किया है।

इस किताब में डॉ.उदवाडिया लिखते हैं कि सभी के लिए सर्जरी देखभाल मुहैया कराना एक सपने जैसा है और इसे पूरा करने में कई साल और यहां तक दशकों लग सकते हैं, लेकिन जब सभी स्वास्थ्य देखभाल के मौलिक अधिकार की बात आती है तो भारत बेहतर देश साबित होगा।

जिंदगी के आठवें दशक में जा चुके और पद्म भूषण व पद्मश्री से सम्मानित डॉ. उदवाडिया मानते हैं कि देश में सर्जरी देखभाल के लिए स्थायी समाधान की जरूरत है और यह भारत को वहां ले जाएगा जहां इसकी जरूरत है।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया है। डॉ.उदवाडिया ने कहा, ‘‘सर्जरी सुविधा की कमी से देश के सकल घरेलू उत्पाद पर दो प्रतिशत तक असर पड़ता है। पिछले साल तक स्वास्थ्य वोट बैंक नहीं था। गत 70 साल या इससे भी अधिक समय तक वार्षिक बजट में स्वास्थ्य के लिए एक प्रतिशत से कम बजट आवंटित किया जाता था। शुक्र है कि इस महामारी की वजह से प्रत्येक सरकार ने महसूस किया कि यहां से स्वास्थ्य अब बड़ा वोट बैंक बन गया है जो जाति, धर्म, किसान और राहत से परे हैं और यह प्रत्येक भारतीय को प्रभावित करता है।’’

धीरज उमा

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