देश की खबरें | अदालत ने एमपीलैड के तहत जारी निधि, उपयोग को लेकर केंद्र से जानकारी मांगी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 17 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र से कहा है कि उसके पास सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड) के तहत जारी होने वाली धनराशि और उसके उपयोग के संबंध में जो जानकारी है वह उसके समक्ष रखे।

अदालत ने यह आदेश केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उन दो आदेशों के खिलाफ केंद्र की दो अलग-अलग अर्जियों पर सुनवाई करते हुए जारी किया जिसमें सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को निर्देश दिये गए थे कि वह एमपीलैड योजना के तहत किए गए कार्यों के बारे में अपनी वेबसाइट पर ‘‘सांसद-वार, निर्वाचन क्षेत्र-वार और कार्य-वार विवरण जारी करे और उसमें लाभार्थियों के नामों का भी उल्लेख हो।

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न्यायमूर्ति नवीन चावला ने मंत्रालय को सूचना देते हुए एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया और मामले को 24 सितंबर को आगे की सुनवायी के लिए सूचीबद्ध किया।

गत 14 अगस्त को यह आदेश तब आया जब मंत्रालय ने कहा कि वह अपनी वेबसाइट पर एमपीलैड के तहत जारी धनराशि और उपयोग से संबंधित जानकारी का खुलासा पहले से करता रहा है।

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अदालत ने हालांकि कहा कि वह उस जानकारी को देखना चाहती है जो मंत्रालय द्वारा एकत्रित और संग्रहित की जाती है। अदालत ने मंत्रालय से एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा।

मंत्रालय ने केंद्र सरकार के वकील (वरिष्ठ पैनल) राहुल शर्मा और अधिवक्ता सी के भट्ट के माध्यम से दायर अपनी अर्जियों में कहा है कि सीआईसी ने अपनी शक्ति और अधिकार क्षेत्र से परे काम किया है जो उसे सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत हासिल है।

सीआईसी ने आरटीआई अधिनियम के तहत दायर दो अलग-अलग मामलों में 16 सितंबर, 2018 और 16 अक्टूबर, 2018 के अपने आदेशों में मंत्रालय को निर्देश दिया था कि वह सांसद-वार, निर्वाचन क्षेत्र-वार और कार्य-वार विवरण एकत्रित करें और उसका खुलासा करे।

उसने मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया था कि यह जानकारी प्रत्येक सांसद द्वारा आरटीआई अधिनियम के अनुसार स्वेच्छा से बताई जाए।

इसके अलावा, सीआईसी ने मंत्रालय को इसको लेकर भी कदम उठाने की सिफारिश की थी कि सांसदों द्वारा उनके पांच साल के कार्यकाल के प्रत्येक वर्ष जारी होने वाले धन को जमा करके और राजनीतिक लाभ के लिए अंतिम वर्ष में खर्च करके एमपीलैड धन का कथित 'दुरुपयोग' ना हो।

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