देश की खबरें | न्यायालय ने ‘अरे-कटिका’ समुदाय को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने संबंधी याचिका खारिज की

नयी दिल्ली, 21 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक समुदाय को देश के सभी राज्यों में अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल करने संबंधी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से कहा, ‘‘ऐसी याचिका कैसे स्वीकार की जा सकती है? यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों से समाप्त हो चुका है... हम इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकते। हम इसमें अल्पविराम भी नहीं जोड़ सकते।’’

वकील ने कहा कि वह याचिका वापस ले लेंगे और उच्च न्यायालय का रुख करेंगे।

इस पर पीठ ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय के न्याय क्षेत्र के भी नहीं है। यह केवल संसद ही कर सकती है। यह बहुत अच्छी तरह से स्थापित है। इसमें कुछ भी नहीं बदला जा सकता है।’’

न्यायमूर्ति गवई ने कहा, ‘‘ आप जानते हैं कि मणिपुर में क्या हुआ।’’

पीठ ने याचिकाकर्ता ‘तेलंगाना राज्य अरे-कटिका’ (खटिक) संघ को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

अधिवक्ता सुनील प्रकाश शर्मा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि ‘अरे-कटिका (खटिक)’ समुदाय हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और गुजरात सहित कई राज्यों में अनुसूचित जाति श्रेणी में सूचीबद्ध है।

याचिका में कहा गया कि शेष राज्यों में यह समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में सूचीबद्ध है।

इसमें कहा गया, ‘‘भारत भर में कटिका/खटिका समुदाय के सामाजिक रीति-रिवाज और संस्कार समान हैं।’’

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