नयी दिल्ली, 29 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला को उसकी बच्ची को कुछ दिनों के लिए विदेश ले जाने की अनुमति देने के एक परिवार न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा कि इस समय उसके द्वारा कोई भी हस्तक्षेप बच्ची को सिर्फ मानसिक पीड़ा देगा।
उल्लेखनीय है कि महिला और उसके पति एक दूसरे से अलग रहते हैं तथा उनके बीच कानूनी लड़ाई चल रही है।
न्यायमूर्ति डी.के. शर्मा ने 22 जून को जारी आदेश में कहा, ‘‘इस अदालत का यह दृढ़ता से मानना है कि बच्ची के संरक्षण के विषय में यह अदालत बच्ची के कल्याण पर प्रमुखता से विचार करेगी।’’
उच्च न्यायालय व्यक्ति (महिला के पति) की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसने यहां स्थित एक परिवार न्यायालय के आठ जून के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें महिला को बच्ची को 25 जून से तीन जुलाई तक, नौ दिनों के लिए मलेशिया ले जाने की अनुमति दी गई है।
व्यक्ति ने दलील दी है कि परिवार न्यायालय ने इस तथ्य पर विचार किये बगैर आदेश जारी किया कि बच्ची की मां द्वारा उसे ले भागने का खतरा है और उसने (परिवार न्यायालय ने) उसे यह शपथपत्र दाखिल करने को नहीं कहा कि वह अदालत के संरक्षण में बच्ची को वापस लाएगी।
उच्च न्यायालय ने याचिका पर महिला को नोटिस जारी किया और विषय की आगे की सुनवाई 15 जुलाई के लिए निर्धारित कर दी।
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