बेंगलुरू, 15 जून कर्नाटक उच्च न्यायालय ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत दर्ज एक मामले में पादरी प्रसन्ना कुमार सैमुअल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है।
प्रसन्ना कुमार सैमुअल, बेंगलुरु के चर्च ऑफ साउथ इंडिया (सीएसआई) कर्नाटक सेंट्रल डायोसिस के बिशप हैं।
शहर के एक स्कूल परिसर में कुछ लड़कियों के कथित यौन उत्पीड़न के संबंध में 2015 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और पॉक्सो अधिनियम के तहत प्रसन्ना कुमार सैमुअल सहित पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
हालांकि, पुलिस ने प्रसन्ना कुमार के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को वापस ले लिया था, लेकिन मुकदमे के दौरान उन्हें दिसंबर 2017 में सरकारी वकील द्वारा दायर एक आवेदन पर तलब किया गया था। इसे ही उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई थी।
न्यायमूर्ति हेमंत चंदनगौदर ने 25 मई को कुमार के खिलाफ कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा कि आरोपपत्र के साथ संलग्न दस्तावेज यह साबित नहीं करते कि याचिकाकर्ता ने उपरोक्त अपराध किए हैं और जांच अधिकारी ने इस न्यायालय के समक्ष 19 नवंबर 2019 को कहा था कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई सबूत मौजूद नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ मजिस्ट्रेट ने आरोपपत्र के साथ संलग्न दस्तावेज पर गौर किए बिना और बिना सोचे-समझे समन जारी किया जो अस्वीकार्य है और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।’’
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