नयी दिल्ली, 28 अगस्त दिल्ली की एक अदालत ने तिलक नगर थाने के प्रभारी को एक महिला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए जिसने कथित तौर पर अपना सामान लेने के लिए अपने ससुर के घर का ताला तोड़ने की कोशिश की थी।
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट देवांशु सजलान शिकायतकर्ता के वकील प्रशांत दीवान की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। यह अर्जी दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 156 (3) के तहत दायर की गयी और इसमें पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने का अनुरोध किया गया था।
सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत कोई मजिस्ट्रेट पुलिस थाने के प्रभारी को संज्ञेय अपराध की जांच के निर्देश दे सकता है।
शिकायतकर्ता ने कहा कि बहू ने कुछ अन्य लोगों के साथ पिछले वर्ष 27 जून को उनके घर का ताला तोड़कर उसमें घुसने की कोशिश की थी।
अदालत ने शनिवार को पारित आदेश में कहा कि कार्रवाई रिपोर्ट के अनुसार बहू ने अपना सामान निकालने के लिए ताला तोड़ा और मामला ‘पारिवारिक विवाद’ का है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘अगर आरोपी (बहू) अपना सामान लेना भी चाहती थी तो उसे शिकायतकर्ता की अनुमति से ऐसा करना चाहिए था।’’
आदेश में कहा गया, ‘‘अगर शिकायतकर्ता उसे सामान लेने की अनुमति नहीं दे रहा था ते उसे कानूनी प्रक्रिया के जरिए स्त्रीधन अथवा अपना सामान हासिल करने के लिए अदालत का आदेश प्राप्त करना चाहिए था।’’
मजिस्ट्रेट ने कहा कि दो पहलुओं पर गौर किया जाना है, पहला ये कि क्या शिकायत में लगाए गए आरोप इस बात को उजागर करते हैं कि संज्ञेय अपराध हुआ और दूसरा ये कि क्या मौके पर जांच की जरूरत है।
अदालत ने कहा, ‘‘ अर्जी मंजूर की जाती है। तिलक नगर के एसएचओ को सात दिन के भीतर प्राथमिकी दर्ज करने और जांच के निर्देश दिए जाते हैं।’’
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