देश की खबरें | न्यायालय ने आपराधिक मामलों में फैसला नहीं सुनाने को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय पर नाराजगी जतायी

नयी दिल्ली, पांच मई उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि झारखंड उच्च न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखने के बाद 67 आपराधिक अपीलों पर फैसला नहीं सुनाया है।

न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों से उन मामलों पर एक महीने में रिपोर्ट देने को कहा है जिनमें फैसला सुनाना लंबित है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस घटनाक्रम को ‘‘परेशान करने वाला’’ करार दिया और कहा कि वह इस मुद्दे पर कुछ अनिवार्य दिशा-निर्देश बनाएगी।

पीठ ने कहा, ‘‘इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।’’

पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों से चार सप्ताह में उन मामलों पर रिपोर्ट मांगी है जिनमें 31 जनवरी, 2025 को या उससे पहले फैसला सुरक्षित रखा गया है लेकिन आज तक निर्णय नहीं सुनाया गया है।

शीर्ष अदालत ने झारखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा दायर रिपोर्ट पर गौर करने के बाद यह निर्देश पारित किया, जिसमें कहा गया है कि जनवरी, 2022 से दिसंबर, 2024 तक खंडपीठ द्वारा सुनी गई 56 आपराधिक अपीलों में आदेश सुरक्षित रखे जाने के बावजूद फैसला नहीं सुनाया गया है।

उच्च्तम न्यायालय ने यह भी कहा कि एकल पीठ के न्यायाधीश के समक्ष आदेश सुरक्षित रखे जाने के बावजूद 11 आपराधिक अपीलों पर फैसला नहीं सुनाया गया है।

शीर्ष अदालत आजीवन कारावास की सजा पाने वाले चार दोषियों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने अधिवक्ता फौजिया शकील के माध्यम से उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।

याचिका में दावा किया गया था कि झारखंड उच्च न्यायालय ने 2022 में दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील पर आदेश सुरक्षित रखा था, लेकिन फैसला नहीं सुनाया जिसके कारण वे सजा में छूट का लाभ लेने में सक्षम नहीं थे।

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