देश की खबरें | न्यायालय ने विधेयकों को मंजूरी रोकने से जुड़े तमिलनाडु सरकार-राज्यपाल विवाद में सवाल तय किए

नयी दिल्ली, छह फरवरी उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी रोक कर रखने को लेकर राज्य सरकार और राज्यपाल आर एन रवि के बीच विवाद के निपटारे के लिए बृहस्पतिवार को आठ सवाल तैयार किए।

इन सवालों में ‘पॉकेट वीटो’ की अवधारणा, राज्यपाल के अधिकार और उनके विवेकाधिकार पर सवाल शामिल हैं।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने ये सवाल तैयार किए। पीठ, तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी की दलीलें सुन रही है। मामले की सुनवाई जारी है।

पीठ ने दिन की कार्यवाही शुरु होते ही सवालों को सूचीबद्ध कर दिया।

इनमें पहला सवाल है, “जब कोई राज्य विधानसभा विधेयक पारित कर उसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजती है और राज्यपाल अपनी मंजूरी रोक कर रखते हैं, लेकिन विधेयक को सदन में दोबारा पारित कर उनके पास भेजा जाता है, तो क्या राज्यपाल को उसे एक बार फिर रोक कर रखने का अधिकार है?”

अगला सवाल है, “क्या राष्ट्रपति के पास विधेयक को भेजने का राज्यपाल का विवेकाधिकार विशिष्ट मामलों तक सीमित है, या क्या यह कुछ निर्धारित विषयों से परे है?”

पीठ ने कहा कि यह मुद्दे पर विचार करेगी कि विधेयक को मंजूरी देने के बजाय राष्ट्रपति के पास उसे भेजने के राज्यपाल के निर्णय को किन कारणों ने प्रभावित किया।

एक अन्य प्रश्न है, “पॉकेट वीटो’’ की अवधारणा क्या है और भारत के संवैधानिक ढांचे में क्या इसके लिए कोई जगह है।

पीठ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विचार करेगी कि संविधान के अनुच्छेद 200 की व्याख्या किस तरह से की जाए, जो राज्यपाल को राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने या अपने पास रोक कर रखने का अधिकार देता है।

पीठ के मुताबिक, राज्यपाल पुनर्विचार के लिए विधेयक को विधानमंडल को लौटा सकते हैं या उसमें बदलाव करने का सुझाव दे सकते हैं।

पीठ ने पूछा, “जब कोई विधेयक राज्यपाल को भेजा जाता है और पुनर्विचार के लिए (विधानमंडल को) लौटा दिया जाता है, तो क्या राज्यपाल विधानमंडल द्वारा पारित विधेयक को मंजूरी देने के लिए बाध्य है?”

पीठ मामले में बृहस्पतिवार को ही अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी की भी दलीलें सुनेगी।

पीठ, तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर उन दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जो विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने से इनकार करने पर राज्य विधानसभा और राज्यपाल के बीच लंबे समय से जारी टकराव से संबंधित हैं।

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