नयी दिल्ली, 14 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक दुर्गेश पाठक के गत जून में हुए उपचुनाव में राजिंदर नगर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर उनसे (पाठक से) रुख स्पष्ट करने को कहा है।
कथित तौर पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आधार पर पाठक के निर्वाचन को अदालत में चुनौती दी गयी है।
अदालत ने चुनाव आयोग और निर्वाचन अधिकारी को पाठक के नामांकन पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेजों को संरक्षित करने का भी निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने पाठक को निर्वाचन क्षेत्र के एक मतदाता रंजन तिवारी की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें आप नेता के कथित रूप से ‘भ्रष्ट आचरण’ में लिप्त होने के कारण चुनाव को अमान्य घोषित करने का अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ता की दलील है कि विधायक ने अपने नामांकन पत्र में भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कथित अपराधों के लिए उनके खिलाफ एक प्राथमिकी के बारे में खुलासा नहीं किया है, जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन है।
उन्होंने आगे दावा किया कि पाठक ने चुनाव के समय दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य के रूप में 'लाभ का पद' भी संभाला था और इसलिए उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
मामले की अगली सुनवाई 21 नवंबर को होगी।
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