नयी दिल्ली, 30 जुलाई उपग्रह-आधारित राजमार्ग टोल संग्रह प्रणाली शुरू करने के तरीकों पर विचार करने के लिए गठित एक उच्च-स्तरीय समिति ने सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी चिंताओं पर आगे विचार-विमर्श की सिफारिश की है। यह जानकारी बुधवार को संसद को दी गयी।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) फास्टैग प्रणाली (एएफएस) आधारित बैरियर-रहित मुक्त प्रवाह टोलिंग के लिए कॉरिडोर/विस्तार-आधारित परियोजनाओं की ओर आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया है।
गडकरी ने कहा, ‘‘उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों वाली शीर्ष समिति और उच्च-स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति ने सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी विचारों और समग्र परिचालन नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए, उपग्रह-आधारित उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह प्रणाली पर आगे विचार-विमर्श की सिफारिश की है।’’
उन्होंने आगे कहा कि उपग्रह-आधारित उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह प्रणाली राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) पर कहीं भी चालू नहीं है।
टोल संचालन की दक्षता बढ़ाने और राष्ट्रीय राजमार्गों पर बिना किसी भौतिक शुल्क (टोल) प्लाजा के वाहनों की निर्बाध और मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए, उन्होंने कहा कि सरकार ने अवरोध-मुक्त मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (ईटीसी) लागू करने का निर्णय लिया है।
राष्ट्रीय राजमार्गों के चुनिंदा खंडों पर उपलब्ध तकनीक वाली इस प्रणाली में फास्टैग के साथ एक अतिरिक्त सुविधा भी है, जहाँ वाहन उपयोगकर्ताओं से बिना रुके, गति धीमी किए या किसी निश्चित शुल्क प्लाजा लेन में रुके बिना ही शुल्क लिया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘बाधा-रहित टोल प्रणाली लागू करने के लिए प्रस्ताव हेतु अनुरोध (आरएफपी) आमंत्रित/अंतिम रूप दे दिया गया है।’’
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