नयी दिल्ली, 28 फरवरी केंद्र ने महादयी जल विवाद न्यायाधिकरण को अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए समय सीमा बढ़ा दी है और अपने निष्कर्षों को पूरा करने के वास्ते अतिरिक्त छह महीने का समय दिया है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है।
महादयी नदी विवाद में गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्य शामिल हैं, जो नदी के जल बंटवारे को लेकर दशकों से असहमत हैं।
महादयी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन मूल रूप से 16 नवंबर, 2010 को अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत महादयी नदी और इसकी नदी घाटी से संबंधित विवादों का निपटारा करने के लिए किया गया था।
न्यायाधिकरण को शुरू में तीन साल के भीतर, 15 नवंबर 2013 तक अपनी रिपोर्ट और निर्णय प्रस्तुत करना था। न्यायाधिकरण ने हालांकि 21 अगस्त, 2013 को अपने कामकाज की प्रभावी तिथि का हवाला देते हुए समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया, जिसे बाद में केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी।
तब से, न्यायाधिकरण को कई बार विस्तार दिया गया है। नवीनतम विस्तार तब दिया गया है जब न्यायाधिकरण ने अपनी रिपोर्ट पूरी करने के लिए एक अतिरिक्त वर्ष का अनुरोध किया था।
इसके बजाय, केंद्र ने न्यायाधिकरण को अपने निष्कर्षों को अंतिम रूप देने की आवश्यकता का हवाला देते हुए छह महीने का विस्तार दिया है।
न्यायाधिकरण ने 14 अगस्त, 2018 को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट और निर्णय प्रस्तुत किया था लेकिन संबंधित राज्यों के बाद के संदर्भों और आवेदनों के कारण और विचार-विमर्श किये जाने की आवश्यकता हुई।
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