नयी दिल्ली, 22 सितम्बर गुजरात स्थित स्टर्लिंग बायोटेक समूह के मालिकों और अन्य के खिलाफ 8,100 करोड़ रुपये के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले को मंगलवार को यहां उसी न्यायाधीश को फिर से सौंपा गया, जिन्होंने एक दिन पहले यह कहते हुए खुद को इसकी सुनवाई से अलग कर लिया था कि मामले में एक पक्ष ने उनसे सम्पर्क किया था।
पटियाला हाउस कोर्ट कॉम्प्लेक्स के जिला न्यायाधीश ने तब मामले को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा को वापस भेज दिया था जब दोनों पक्षों--प्रवर्तन निदेशालय और आरोपियों-- के वकीलों ने इस पर सहमति जतायी।
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एएसजे राणा ने सोमवार को मामले की सुनवायी से स्वयं को यह कहते हुए अलग कर लिया था कि उन्हें तब ‘‘हैरानी’’ हुई जब उनके एक सहपाठी ने आरोपियों की ओर से उनसे सम्पर्क किया। उन्होंने घटनाक्रम को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ करार दिया था।
एएसजे ने खुद को मामले की सुनवायी से अलग करते हुए कहा था, ‘‘"मेरा मन इस मामले में आगे बढ़ने का नहीं करता। यह बहुत शर्मनाक है और मैं स्वयं को इससे अलग करते हुए मामले को जिला न्यायाधीश के समक्ष रख रहा हूं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूरा मामला सुनने के बाद मुझे खुद को इससे अलग करना पड़ रहा है ...।’’
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न्यायाधीश को ईडी द्वारा दायर उस अर्जी पर आदेश पारित करना था, जिसमें उसने कंपनी के मालिकों को एक नये कानून के तहत आर्थिक भगोड़ा घोषित करने का अनुरोध किया था।
ईडी ने नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा, दीप्ति संदेसरा और हितेश पटेल को भगोड़ा आर्थिक अपराध कानून की धारा चार के तहत भगोड़ा घोषित करने का अनुरोध किया था।
ईडी के अनुसार, चारों स्टर्लिंग ग्रुप के प्रवर्तक हैं और बैंकों के कंसोर्टियम से संबंधित 8,100 करोड़ रुपये के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में आपराधिक जांच से बचने के लिए देश छोड़कर भाग गए हैं।
इस बीच, ईडी के एक अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने कहा कि सोमवार की अदालत की कार्यवाही के संबंध में मीडिया की एक खबर में गलत तरीके से उनके हवाले से बयान प्रकाशित किया गया है। हुसैन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस मामले के संबंध में कोई बयान नहीं दिया है।
चारों के खिलाफ इससे पहले एक अदालत द्वारा धनशोधन रोकथाम कानून के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी किये गए थे।
एजेंसी ने इस मामले में एक आरोप पत्र पीएमएलए के तहत दायर किया है।
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