मुंबई, 27 अगस्त भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को कहा कि कोरोना वारयस महामारी के प्रकोप से निपटने के लिए चाहे दर में कटौती हो या फिर अन्य नीतिगत कदम, आरबीआई के तरकश के तीर खत्म नहीं हुए हैं।
उन्होंने कहा कि आरबीआई अपने हथियारों को बचाकर रखना चाहता था, इसलिए इस महीने की शुरुआत में नीतिगत समीक्षा के दौरान यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया गया।
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वित्तीय दैनिक समाचार पत्र बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा आयोजित एक वेब गोष्ठी में दास ने एक सवाल के जवाब में यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि चूंकि महामारी के बाद आरबीआई दो बार दरों में कटौती कर चुका है, इसलिए आगे प्रकोप से निपटने के लिए क्या उपाए बचे हैं।
दास ने कहा, ‘‘हमने अपने नीतिगत विकल्पों को खत्म नहीं किया है, चाहे वह दर में कटौती से संबंधित हो या केंद्रीय बैंकिंग के किसी अन्य पहलू से। हमारे तरकश में तीर समाप्त नहीं हुये हैं, उपाय अभी और हैं।’’
सरकारी प्रतिभूतियों के प्रतिफल में बढ़ोतरी की आशंका पर दास ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि आरबीआई के उपाए कारगर नहीं रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बांड का प्रतिफल सिर्फ पिछले पखवाड़े में बढ़ा है, और आमतौर पर पिछले कुछ महीनों के दौरान 5.70 से 5.79 प्रतिशत के बीच रहा है।
उन्होंने माना कि हालांकि, बाद में यह बढ़कर 6.10 प्रतिशत से अधिक हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई का काम बाजारों के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करना है।
उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने पिछली दो मौद्रिक समीक्षाओं में नीतिगत दर में 1.15 प्रतिशत की कटौती की है। इसके बाद मुद्रास्फीति उसके तय दायर से ऊपर निकल जाने के बाद बैंक ने पिछली समीक्षा में दरों में कोई बदलाव नहीं किया।
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