अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को विकास दुबे के बिकरू स्थित घर को जेसीबी की मदद से गिरा दिया गया । इस दौरान वहां खड़े वाहनों को भी नष्ट कर दिया गया। इस मौके पर वहां भारी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद थे । दुबे के घर का भारी भरकम दरवाजा और बरामदा और चहारदीवारी को जेसीबी मशीन की मदद से एक झटके में जमींदोज कर दिया गया ।
पुलिस द्वारा विकास दुबे का घर गिराये जाने की बाबत सवाल पूछे जाने पर कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने बताया, ''गांव के लोगों का कहना था कि दुबे ने दबंगई और गुंडागर्दी से लोगों की जमीन पर कब्जा किया था और लोगों से जबरन वसूली कर घर बनाया था । गांव में यह अपराध का गढ़ था, गांव वालो में उसके प्रति बहुत गुस्सा था ।''
यह भी पढ़े | तमिलनाडु सरकार का ऐलान, चेन्नई में छह जुलाई से लॉकडाउन में छूट दी जाएगी.
उन्होंने बताया कि दुबे के परिवार वालों पर गांव के नाराज लोगों ने हमला भी किया था लेकिन पुलिस की मौजूदगी के कारण कोई हादसा नहीं हुआ ।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि मुठभेड़ के पहले चौबेपुर के थानाध्यक्ष विनय तिवारी कुछ पुलिसकर्मियों के साथ दुबे के घर गये थे और राहुल तिवारी नामक व्यक्ति से उसका समझौता कराने का प्रयास कर रहे थे। राहुल वही व्यक्ति है जिसने दुबे के खिलाफ मामला दर्ज कराया था और उसी वजह से पुलिस ने दुबे के घर दबिश दी थी ।
सूत्रों का कहना है कि दुबे और राहुल के बीच समझौते को गये थानाध्यक्ष तिवारी के साथ दुबे ने बदतमीजी की थी और दोबारा घर न आने की धमकी भी दी थी । कहा जाता है कि दुबे ने एफआईआर लिखाने वाले राहुल को पीटा भी था ।
इस घटना के बाद थानाध्यक्ष तिवारी ने बिल्हौर के क्षेत्राधिकारी देवेंद्र कुमार मिश्रा को इसकी जानकारी दी, तब मिश्रा चौबेपुर, शिवराजपुर और बिठूर तीन थानों की फोर्स लेकर दुबे को गिरफ्तार करने बृहस्पतिवार देर रात उसके गांव पहुंचे ।
विनय तिवारी ने शनिवार को पत्रकारों से कहा, '' पुलिस दुबे के घर उसे गिरफ्तार करने गयी थी, ऐसा अंदेशा बिल्कुल भी नहीं था कि दूसरी तरफ से गोलियां चलने लगेंगी । अचानक चली गोलियों से पुलिस बल को भारी नुकसान उठाना पड़ा ।''
तिवारी के टीवी चैनलों पर अपना बयान देने के कुछ समय बाद पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने उन्हें निलंबित कर दिया ।
पुलिस महानिरीक्षक अग्रवाल ने पत्रकारों को बताया, '' थानाध्यक्ष विनय तिवारी के ऊपर लग रहे आरोपों के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया है । उनके ऊपर लगे आरोपों की गहन जांच की जा रही है । अगर उनका या किसी भी पुलिसकर्मी का इस घटना से कोई संबंध निकला तो उसे न केवल बर्खास्त किया जायेगा बल्कि जेल भी भेजा जायेगा ।''
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुछ पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह जाना जा सके कि दुबे को उसके घर पर पुलिस की छापेमारी के बारे में पहले से खबर कैसे लगी और उसने पूरी तैयारी के साथ पुलिस दल पर हमला कर दिया ।
अग्रवाल ने बताया, ''विकास दुबे और उसके सहयोगियों को पकड़ने के लिये पुलिस की 25 टीमें लगायी गयी हैं जो प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा कुछ दूसरे प्रदेशों में भी छापेमारी कर रही है ।’’
इस बीच लखनऊ में एक पुलिस अधिकारी ने इस मुठभेड़ में खुफिया विभाग की नाकामी की बात को सिरे से खारिज कर दिया ।
कानपुर की स्थानीय पुलिस के मुताबिक दुबे ने अपनी निजी सेना बना रखी थी और उसमें युवाओं की भर्ती करता था और उन्हें हथियार उपलब्ध कराता था ।
इस बीच कानपुर और कानपुर देहात जिलों के अलावा आसपास के इलाकों की सीमाओं को सील कर पुलिस द्वारा सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ।
गौरतलब है कि गुरुवार देर रात कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के गांव बिकरू निवासी दुर्दांत अपराधी विकास दुबे को उसके गांव पकडऩे पहुंची पुलिस टीम पर हमला कर दिया गया था, जिसमें एक क्षेत्राधिकारी, एक थानाध्यक्ष समेत आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे। मुठभेड़ में पांच पुलिसकर्मी, एक होमगार्ड और एक आम नागरिक घायल है।
बिल्हौर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक भगवती प्रसाद सागर ने बताया, ''बिकरू गांव कानपुर जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर है । गांव से करीब 500 मीटर दूर एक नदी है, जिसे पार करते ही कानपुर देहात जिले की सीमा शुरू हो जाती है।’’
उन्होंने बताया कि गांव में समाज के सभी वर्गों के लोग रहते हैं और यह एक मिश्रित आबादी वाला गांव है ।
विधायक ने दावा किया कि विकास दुबे ने 2017 के उप्र विधानसभा के चुनाव में उन्हें हराने के लिये बहुत प्रयास किये, लेकिन वह चुनाव जीत गये ।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY