विदेश की खबरें | थाईलैंड : महारानी के काफिले में बाधा डालने के मामले में छात्र कार्यकर्ता बरी
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

यह एक ऐसा अपराध था जिसके लिए उन्हें 16 साल जेल की सजा हो सकती थी। यहां तक कि इसके लिए मौत की सजा का भी प्रावधान है।

‘बैंकॉक क्रिमिनल कोर्ट’ ने एक ऐसे मामले में फैसला दिया है, जो उस कानून के तहत दर्ज किया गया था जिसके तहत दुर्लभ ही मामले दर्ज किए जाते हैं। ‘‘रानी, उत्तराधिकारी और रीजेंट की स्वतंत्रता को नुकसान पहुंचाने’’ के इरादे से किए गए कृत्यों के खिलाफ इस कानून के तहत मामले दर्ज किए जाते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों को इस कानून के तहत पहले कभी दर्ज किया गया कोई मुकदमा याद तक नहीं है।

यह फैसला थाईलैंड के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के लिए एक दुर्लभ कानूनी जीत का प्रतिनिधित्व करता है।

अक्सर रूढ़िवादी अदालतों में लोगों को कठिन लड़ाई का सामना करना पड़ता है, जिन्हें व्यापक रूप से राजनीतिक तथा सामाजिक परिवर्तन के खिलाफ एक दीवार के रूप में देखा जाता है।

फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत कक्ष में लोगों ने तालियां बजाकर अपनी खुशी जाहिर की। मुस्कुराते हुए प्रतिवादियों ने एक-दूसरे को गले लगाया। अदालत में ऐसा महाौल बनने से न्यायाधीश को पूरा आदेश सुनाने के लिए लोगों को शांत होने के लिए कहना पड़ा।

प्रतिवादियों में से एक एकचाई होंगकांगवान ने कहा कि उन्हें हमेशा विश्वास था कि अदालतें न्यायपूर्ण फैसला करेंगी और न्यायाधीशों ने दिखाया कि लोग अब भी न्याय प्रणाली पर भरोसा कर सकते हैं।

‘इंटरनेशनल रिलेशन्स’ विषय के छात्र बंकुएनुन पाओथोंग (23) का कहना था कि उन्हें नहीं पता था कि एक शाही काफिला गुजरने वाला है। उन्होंने कहा था कि जब उन्होंने शाही काफिला देखा तो उन्होंने लोगों से दूर जाने का आग्रह किया।

यह मामला 14 अक्टूबर, 2020 को बैंकॉक में एक रैली के दौरान हुई घटना से उपजा है। रैली में शामिल लोग देश की शक्तिशाली राजशाही के विशेषाधिकारों में कटौती सहित लोकतांत्रिक सुधारों की मांग कर रहे थे।

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