देश की खबरें | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ पीटीआई के विशेष साक्षात्कार का मूल पाठ दो

प्रश्न: भारत ने अफ्रीका संघ को जी-20 का स्थायी सदस्य बनाने का प्रस्ताव दिया है। यह ‘ग्लोबल साउथ’ को एक आवाज देने में कैसे मदद करेगा। यह आवाज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुनी जानी क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: इससे पहले कि मैं आपके प्रश्न का उत्तर दूं, मैं आपका ध्यान हमारे जी-20 की अध्यक्षता के विषय - 'वसुधैव कुटुम्बकम- एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' की ओर दिलाना चाहता हूं। यह सिर्फ एक नारा नहीं है बल्कि एक व्यापक दर्शन है जो हमारे सांस्कृतिक लोकाचार से लिया गया है।

यह भारत के भीतर और दुनिया के प्रति हमारे दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करता है।

भारत में हमारे ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ (पुराने प्रदर्शन) को देखें। हमने उन जिलों की पहचान की जिन्हें पहले 'पिछड़ा' और उपेक्षित करार दिया गया था। हम एक नया दृष्टिकोण लाये और वहां के लोगों की आकांक्षाओं को सशक्त बनाया। आकांक्षी जिला कार्यक्रम शुरू किया गया। इनमें से कई जिलों में महत्वपूर्ण प्रगति के साथ इसके अद्भुत परिणाम सामने आ रहे हैं।

हमने बिना बिजली वाले गांवों और घरों की पहचान की और उनका विद्युतीकरण किया। हमने ऐसे घरों की पहचान की जहां पीने का पानी उपलब्ध नहीं था और नल के पानी के 10 करोड़ कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। इसी तरह, हम उन लोगों तक पहुंचे जिनके पास शौचालय और बैंक खाते जैसी सुविधाएं नहीं थीं। उन्हें सक्षम और सशक्त किया गया।

यह वह दृष्टिकोण है जो वैश्विक स्तर पर भी हमारा मार्गदर्शन करता है। हम उन लोगों को जोड़ने के लिए काम करते हैं जिन्हें लगता है कि उनकी आवाज नहीं सुनी जा रही है।

स्वास्थ्य का उदाहरण लें। हम 'एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य' के दृष्टिकोण में विश्वास करते हैं। यह खुद को अलग-अलग तरीकों से प्रकट कर रहा है।

भारत की योग और आयुर्वेद की प्राचीन प्रणालियां दुनिया को स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में ध्यान केंद्रित करने में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने में मदद कर रही हैं।

कोविड-19 के दौरान हम केवल अपने लिए नहीं बल्कि सभी के लिए सोच रहे थे। हमारी बाधाओं के बावजूद, हमने दुनिया के लगभग 150 देशों को दवाओं और टीकों के साथ सहायता प्रदान की। इनमें से कई देश ‘ग्लोबल साउथ’ से थे।

विगत दशकों में जलवायु संबंधी कई बैठकें हुई हैं। ये चर्चाएं, सर्वोत्तम इरादों के बावजूद, इस बात के इर्द-गिर्द घूमती रहीं कि किसे दोषी ठहराया जाए।

लेकिन हमने 'कर सकते हैं' की भावना के साथ एक सकारात्मक और स्वीकारोक्ति वाला दृष्टिकोण अपनाया। हमने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना की और 'वन वर्ल्ड, वन सन, वन ग्रिड' के दृष्टिकोण के तहत देशों को एक साथ लाने की पहल की।

इसी तरह, हमने ‘कोएलिशन फॉर डिजास्टर रिज़िल्यन्स’ शुरू किया ताकि दुनिया भर के देश, विशेष रूप से विकासशील देश, एक-दूसरे से सीखें और बुनियादी ढांचे का निर्माण करें जो आपदाओं के दौरान भी लचीला हो।

हमने हिंद-प्रशांत द्वीप समूह सहयोग मंच सहित दुनिया के छोटे द्वीप राष्ट्रों के साथ भी काम किया है ताकि उनके हितों को आगे बढ़ाया जा सके।

जब हम कहते हैं कि हम दुनिया को एक परिवार के रूप में देखते हैं, तो हम वास्तव में इसका अनुसरण भी करते हैं। हर देश की आवाज मायने रखती है, चाहे उसका आकार, उसकी अर्थव्यवस्था या क्षेत्र कुछ भी हो।

इसमें हम महात्मा गांधी, डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर, नेल्सन मंडेला और क्वामे नक्रुमा (घाना के दिवंगत प्रख्यात नेता) की मानवीय दृष्टि और आदर्शों से भी प्रेरित हैं।

अफ्रीका के प्रति हमारा लगाव स्वाभाविक है। अफ्रीका के साथ हमारे सदियों पुराने सांस्कृतिक और वाणिज्यिक संबंध रहे हैं। उपनिवेशवाद के खिलाफ आंदोलनों का हमारा साझा इतिहास रहा है। एक युवा और आकांक्षी राष्ट्र के रूप में, हम अफ्रीका के लोगों और उनकी आकांक्षाओं से भी खुद को जोड़ते हैं। पिछले कुछ सालों में यह रिश्ता और भी मजबूत हुआ है।

प्रधानमंत्री बनने के बाद मैंने जो शुरुआती शिखर सम्मेलन आयोजित किए, उनमें से एक 2015 में भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन था। अफ्रीका के 50 से अधिक देशों ने भाग लिया और इसने हमारी साझेदारी को बहुत मजबूत किया।

बाद में, 2017 में, पहली बार, अफ्रीकी विकास बैंक का एक शिखर सम्मेलन अफ्रीका के बाहर, अहमदाबाद में आयोजित किया गया था।

जी-20 में भी अफ्रीका हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जी-20 की अध्यक्षता के दौरान हमने जो पहली चीजें कीं, उनमें से एक ‘वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ समिट’ का आयोजन करना था, जिसमें अफ्रीका की उत्साहपूर्ण भागीदारी थी।

हम मानते हैं कि ग्रह के भविष्य के लिए कोई भी योजना सभी आवाजों के प्रतिनिधित्व और मान्यता के बिना सफल नहीं हो सकती है। विशुद्ध रूप से उपयोगितावादी विश्व दृष्टि से बाहर आने और 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' मॉडल को अपनाने की आवश्यकता है।

प्रश्न: आपने कुछ साल पहले सौर गठबंधन शुरू किया था। अब आप जैव-ईंधन गठबंधन का प्रस्ताव कर रहे हैं, जिसका हमें विश्वास है कि आप जी-20 में अनावरण करेंगे। इसका उद्देश्य क्या है और यह ऊर्जा सुरक्षा पर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों की मदद कैसे करेगा?

जवाब: 20वीं सदी और 21वीं सदी की दुनिया में बड़ा अंतर है। दुनिया अधिक परस्पर जुड़ी हुई और एक-दूसरे पर आश्रित है, और यह सही भी है।

लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि एक-दूसरे से जुड़े और एक-दूसरे पर आश्रित दुनिया में, दुनिया भर के देशों की क्षमता और क्षमताएं जितनी अधिक होंगी, वैश्विक लचीलापन उतना ही अधिक होगा।

जब एक श्रृंखला में कड़ी कमजोर होती है, तो प्रत्येक संकट पूरी श्रृंखला को और कमजोर कर देता है। लेकिन जब कड़ी मजबूत होती हैं, तो वैश्विक श्रृंखला एक-दूसरे की ताकत का उपयोग करके किसी भी संकट को संभाल सकती है।

एक तरह से यह विचार महात्मा गांधी के आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण में भी देखा जा सकता है, जो वैश्विक स्तर पर भी प्रासंगिक बना हुआ है।

इसके अलावा, हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारे ग्रह की सुरक्षा और संरक्षण एक साझा जिम्मेदारी है जिसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

हम भारत के भीतर जलवायु केंद्रित पहलों में बड़ी प्रगति कर रहे हैं।

भारत ने कुछ ही वर्षों में अपनी सौर ऊर्जा क्षमता को 20 गुना बढ़ा दिया है।

पवन ऊर्जा के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष चार देशों में शामिल है। इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति में, भारत नवाचार और चीजों को अपनाने, दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

हम शायद जी-20 देशों में से पहले हैं जिन्होंने निर्धारित तिथि से नौ साल पहले अपने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त किया है। ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ (एकल उपयोग वाले प्लास्टिक) के खिलाफ हमारी कार्रवाई को दुनिया भर में मान्यता मिली है।

हमने आरोग्य और स्वच्छता के क्षेत्रों में भी काफी प्रगति की है। स्वाभाविक रूप से, हम वैश्विक प्रयासों में सिर्फ शामिल नहीं हैं बल्कि कई ऐसे पहल हैं जिनमें हम अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन जैसी पहल देशों को ग्रह के लिए एक साथ ला रही हैं। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन को 100 से अधिक देशों के शामिल होने से एक शानदार प्रतिक्रिया मिली है!

हमारी मिशन ‘लाइफ’ (पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली) पहल पर्यावरण के लिए जीवन शैली पर केंद्रित है। आज, प्रत्येक समाज में हमारे पास ऐसे लोग हैं जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं। वे क्या खरीदते हैं, वे क्या खाते हैं, वे क्या करते हैं - प्रत्येक निर्णय इस बात पर आधारित होता है कि यह उनके स्वास्थ्य की देखभाल कैसे करता है। उनकी पसंद न केवल इस बात से निर्देशित होती है कि यह आज उन्हें कैसे प्रभावित करेगा, बल्कि इस बात से निर्देशित होती है कि इसका दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा। इसी तरह, दुनिया भर के लोग ग्रह के प्रति जागरूक बनने के लिए एक साथ आ सकते हैं। प्रत्येक जीवन शैली का निर्णय इस आधार पर किया जा सकता है कि लंबी अवधि में ग्रह पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

अब, जैव ईंधन गठबंधन इस दिशा में एक और कदम है। इस तरह के गठबंधनों का उद्देश्य विकासशील देशों के लिए अपने ऊर्जा संक्रमण को आगे बढ़ाने के लिए विकल्प बनाना है। जैव ईंधन चक्रीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं। बाजार, व्यापार, प्रौद्योगिकी और नीति - अंतरराष्ट्रीय सहयोग के सभी पहलू ऐसे अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण हैं।

इस तरह के विकल्प ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ा सकते हैं, घरेलू उद्योग के लिए अवसर पैदा कर सकते हैं, और हरित रोजगार पैदा कर सकते हैं। एक ऐसा बदलाव सुनिश्चित करने में ये सभी महत्वपूर्ण तत्व हैं, जो किसी को पीछे नहीं छोड़ते हैं।

जारी पीटीआई टीम

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