टीबी और हैजे से होने वाली मौतें लॉकडाउन के दौरान जान बचाने के प्रयासों को कर देंगी बेअसर
तपेदिक और हैजे जैसी बीमारियों को नजरअंदाज करने से कोविड-19 के मद्देनजर लागू ल़ॉकडाउन से जिंदगियां बचाने की कोशिशें बेअसर साबित होंगी. उन्होंने कहा कि इन बीमारियों से होने वाली मौतें संभवत: लॉकडाउन के चलते बची जिंदगियों की उपलब्धि को बेअसर कर देंगी.
बेंगलुरु, 24 मई: तपेदिक और हैजे जैसी बीमारियों को नजरअंदाज करने से कोविड-19 (Covid-19) के मद्देनजर लागू ल़ॉकडाउन से जिंदगियां बचाने की कोशिशें बेअसर साबित होंगी. जन स्वास्थ्य क्षेत्र (Public Health Sector) के एक विशेषज्ञ ने कहा है कि जितनी जिंदगियां इन प्रयासों से बचाई गई, उतनी ही जान टीबी और हैजे की वजह से जा सकती हैं.
हैदराबाद (Hyderabad) के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर वी रमण धारा ने कहा कि तपेदिक, हैजा और कुपोषण जैसी गरीबी संबंधी बीमारियों से जान जाने की घटनाओं पर विचार करना ही होगा जिनके लॉकडाउन जारी रहने के दौरान नजरअंदाज किए जाने की आशंका है. उन्होंने कहा कि इन बीमारियों से होने वाली मौतें संभवत: लॉकडाउन के चलते बची जिंदगियों की उपलब्धि को बेअसर कर देंगी.
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उन्होंने पीटीआई- को रविवार को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि हर किसी को इस महामारी को मानवों द्वारा पर्यवारण को पहुंचाए गए बेहिसाब नुकसान को प्रकृति की ओर से दी गई प्रतिक्रिया के रूप में देखना चाहिए जिसके कारण जानवरों के प्राकृतिक वास छिन गए और परिणामस्वरूप इंसानों तथा जानवरों के बीच के संबंध खराब हो गए.
(The above story first appeared on LatestLY on May 24, 2020 02:14 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

