जरुरी जानकारी | ‘कारों पर जीएसटी व्यवस्था से पहले के मुकाबले कम है कर, रॉयल्टी भुगतान में कटौती करें कंपनियां’

नयी दिल्ली, 17 सितंबर वाहन कंपनियों को सरकार से जीएसटी दर घटाने के लिये कहने के बजाए लागत में कमी लाने के लिये अपनी मूल कंपनियों को दी जाने वाली रॉयल्टी में कटौती करनी चाहिये। देश में वाहनों पर ऊंची कर दरों को लेकर आलोचना पर जवाब देते हुए वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह कहा।

सूत्रों ने कहा कि वाहन क्षेत्र की ज्यादातर कंपनियां मौजूदा कराधान और नियामकीय व्यवस्था में खूब आगे बढ़ी हैं। इसका सबूत उनके भारतीय भागीदार द्वारा अपनी विदेशी मूल कंपनियों को रॉयल्टी के तौर पर मोदी रकम का भुगतान किया जाना है।

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टोयोटा मोटर कॉरपोरेशन के भारत में उपाध्यक्ष शेखर विश्वनाथन ने इस सप्ताह कथित रूप से एक साक्षात्कार में कहा था कि भारत में कर की दरें ऊंची है, इसके देखते हुए उनकी कंपनी यहां विस्तार पर विचार नहीं कर रही।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि वाहन क्षेत्र के संदर्भ में भारत की कर नीति पिछले तीन दशकों से पूरी तरह से एकरूपता लिये हुए है। सूत्रों ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था में वाहनों पर कर की दर पहले के मुकाबले कम हैं। जीएसटी व्यवस्था से पहले वैट और उत्पाद शुल्क के तौर पर अधिक कर का भुगतान होता था। अब अचानक से कुछ तबकों द्वारा वाहन क्षेत्र में कर दरों को लेकर असंतोष जताना आश्चर्यचकित करने वाला है।

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एक सूत्र ने कहा, ‘‘वास्तव में इन कंपनियों को सरकार से जीएसटी में कमी लाने के लिये कहने के बजाए विदेशों में स्थित अपनी मूल कंपनियों को दी जाने वाली रॉयल्टी के भुगतान में कमी लाकर विनिर्माण लागत में कमी लानी चाहिए।’’

सूत्र ने कहा कि दुनिया भर में बिना किसी छूट के वाहनों पर ऊंची दर से कर लगाया जाता है। जापान में फिलहाल वाहनों पर तीन तरह का कर है। इसमें एक खरीद, दूसरा इंजन आकार के आधार पर सालाना वाहन कर और प्रत्येक दो साल पर जरूरी निरीक्षण पर भार के अनुसार कर (वेट टैक्स) लगता है। इसके ऊपर ऊंची दर से जीएसटी लगता है।

यूरोपीय संघ में भी वाहनों पर वैट/जीएसटी की आधार दर 20 से 25 प्रतिशत है।

ब्रिटेन वाहन उत्पाद शुल्क लेता है जो कार उत्सर्जन मानकों के हिसाब से अलग है और स्लैब दर 14 प्रतिशत है। इसके अलावा सड़क उपयोग शुल्क लगता है। पुन: दुनिया भर में ऊंची दर से पार्किंग शुल्क भी लगता है।

सूत्रों ने कहा कि जीएसटी पूर्व उच्च प्रभाव के आधार पर ही वाहनों को 28 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में रखा गया है। यात्री वाहनों पर 1 प्रतिशत से 22 प्रतिशत तक क्षतिपूर्ति उपकर लगता है। हालांकि, क्षतिपूर्ति उपकर लगने के बावजूद कुछ मामलों को छोड़कर, जिनमें कुछ शुल्क छूट दी गई थी, कर की दर जीएसटी व्यवस्था से पहले के स्तर से ऊपर नहीं गयी है।

सूत्रों ने कहा कि ‘‘अगर नियामकीय माहौल अनुकूल नहीं होता, जीप, किआ मोटर्स और एम जी मोटर जैसी कंपनियां विनिर्माण संयंत्रों में भारी निवेश नहीं करती। जो कंपनियों भारतीय ग्राहकों के नब्ज को समझती हैं और उसके अनुसार काम कर रही हैं, वो अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।’’

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