नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर चेन्नई के पास पिछले सप्ताह यात्री ट्रेन-मालगाड़ी की टक्कर के बारे में रेलवे के सात वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा तैयार संयुक्त निरीक्षण नोट से पता चलता है कि ट्रेन संभवतः मुख्य लाइन और लूप लाइन के ‘इंटरसेक्शन प्वाइंट’ पर पटरी से उतर गई।
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की तीन सदस्यीय समिति की एक अन्य रिपोर्ट में घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान कुछ ढीले या खुले हिस्से पाए जाने के बाद तोड़फोड़ या साजिश की आशंका जताई गई थी। हालांकि, दुर्घटना के तुरंत बाद तैयार किए गए संयुक्त नोट में साजिश के किसी पहलू का उल्लेख नहीं है।
रेलवे प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त रिपोर्ट दुर्घटना के कारणों के बारे में निर्णायक रूप से नहीं बता सकती, लेकिन यह रेलवे सुरक्षा आयुक्त के लिए अंतिम जांच रिपोर्ट तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है।
मैसूर-दरभंगा बागमती एक्सप्रेस 11 अक्टूबर को रात करीब 8.30 बजे चेन्नई रेल डिवीजन के कवरेपेट्टई रेलवे स्टेशन पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई, जिससे कई यात्री घायल हो गए।
निरीक्षण रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद एक सुरक्षा विशेषज्ञ ने कहा, ‘‘संयुक्त नोट तैयार करने वाले विशेषज्ञों ने यह नहीं कहा कि उन्हें दुर्घटना स्थल पर कोई यांत्रिक हिस्सा खुला या ढीला मिला। इसके बजाय, उन्हें नट, बोल्ट समेत अन्य उपकरण टूटे हुए अवस्था में मिले।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सात अधिकारियों ने संयुक्त नोट में जिस तरह का नुकसान दर्ज किया है, उससे पता चलता है कि ट्रेन मुख्य लाइन और लूप लाइन के इंटरसेक्शन प्वाइंट (मिलन बिंदु) पर पटरी से उतरी।’’
सुरक्षा विशेषज्ञ के दावे को ‘यार्ड सिमुलेशन वीडियो’ से समर्थन मिलता है, जिसमें ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रेन मुख्य लाइन के साथ-साथ लूप लाइन पर चली गई थी।
उत्तर रेलवे में मुख्य सिग्नल और दूरसंचार इंजीनियर/सूचना प्रौद्योगिकी के पद से सेवानिवृत्त के पी आर्य ने कहा, ‘‘ट्रेन केवल एक दिशा में ही चल सकती है, इसलिए ‘यार्ड सिमुलेशन वीडियो’ से संकेत मिलता है कि यह ‘इंटरलॉकिंग प्वाइंट’ पर पटरी से उतर गई होगी। इंजन और कुछ डिब्बे लूप लाइन की ओर बढ़े और मालगाड़ी से टकरा गए, जबकि शेष डिब्बे इधर-उधर बिखर गए और मुख्य लाइन पर भी चले गए।’’
आर्य ने ट्रेन के पटरी से उतरने के लिए पटरी और इंटरलॉकिंग पॉइंट प्रणाली की इंजीनियरिंग खामी की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि जब ट्रेन का ट्रैक बदलने के लिए इंटरलॉकिंग की जाती है, तो पटरियों के बीच कई बिंदुओं पर एक छोटा सा अंतर रह जाता है, जिसके कारण पत्थर, लकड़ी और इसी तरह की अन्य चीजें फंस जाती हैं।
आर्य के अनुसार, कई बार इस समस्या के कारण ट्रेन पटरी से उतर जाती हैं, क्योंकि निगरानी प्रणाली ऐसी फंसी वस्तुओं को ट्रैक करने में विफल हो जाती है।
उन्होंने कहा, ‘‘संयुक्त नोट में कहा गया है कि उन्हें दुर्घटना स्थल से एक फटा हुआ बोरा और ‘टंग रेल’ का एक टुकड़ा मिला है। संभावना है कि यह बोरा ‘टंग रेल’ और ‘स्टॉक रेल’ के बीच के गैप में आ गया हो।’’
शुरुआत में रेलवे अधिकारियों ने टक्कर के संभावित कारण के बारे में कहा था कि यात्री ट्रेन को मेन लाइन के लिए ग्रीन सिग्नल दिया गया था, लेकिन वह लूप लाइन पर चली गई और लूप लाइन पर पहले से ही खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। सुरक्षा विशेषज्ञों ने सिग्नल सिस्टम और इंटरलॉकिंग के बीच समन्वय की कमी को सिग्नलिंग सिस्टम में कुछ खराबी के लिए जिम्मेदार ठहराया था।
यह असामान्य है, क्योंकि सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इंटरलॉकिंग-सिग्नलिंग प्रणाली में, सिग्नल पहलू पटरियों के इंटरलॉकिंग का अनुसरण करता है, जिसका अर्थ है कि यदि मुख्य लाइन के लिए सिग्नल हरा है, तो इंटरलॉकिंग स्वचालित रूप से इस तरह से सेट हो जाएगी कि ट्रेन मुख्य लाइन पर आ जाएगी।
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘...वीडियो, संयुक्त नोट और चालक दल का बयान कि उन्हें इंटरलॉकिंग बिंदु पर झटका लगा, ये सभी दर्शाते हैं कि ट्रेन इंटरलॉकिंग बिंदु पर पटरी से उतर गई। मुझे लगता है कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की जांच से ही इसका पता चल पाएगा।’’
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