चेन्नई, 28 जनवरी तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री गोवी चेझियान ने मंगलवार को आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग मसौदा नियम 2025 राज्य के अधिकारों को छीनने के लिए तैयार किए गए थे और इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
चेझियान ने कहा कि अगर ये नियम लागू होते हैं, तो उच्च शिक्षा विभाग में निर्वाचित राज्य सरकार की भूमिका में कटौती होगी और कुलाधिपति यानी राज्यपाल को राज्य संसाधनों से स्थापित राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति के संबंध में अधिक शक्तियां मिलेंगी।
चेन्नई में संवावादाताओं से बातचीत में मंत्री ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर नये प्रस्तावित नियमों के जरिये राज्य विश्वविद्यालयों पर "पूर्ण नियंत्रण हासिल करने" का प्रयास करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि राज्य संचालित विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति की शक्तियां विधिवत निर्वाचित राज्य सरकार के पास ही रहनी चाहिए।
चेझियान ने दावा किया, "यूजीसी का नया मसौदा शिक्षा क्षेत्र में राज्य के अधिकारों को छीनने के लिए तैयार किए गए हैं। साथ ही, ये विश्वविद्यालयों के लिए अच्छे संकेत नहीं होंगे।"
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार इन नियमों का तब तक विरोध करेगी, जब तक इन्हें वापस नहीं ले लिया जाता और छात्रों एवं अभिभावकों को भी नये मसौदा नियमों पर अपना विरोध दर्ज कराना चाहिए।
चेझियान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक विभिन्न समस्याएं पैदा कर रही है।
उन्होंने कहा, "हर कोई जानता है कि कुलपतियों की नियुक्ति में कौन बाधा डाल रहा है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने नौ राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर नये नियमों का विरोध करने का अनुरोध किया है।"
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