नयी दिल्ली, 31 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने तबलीगी जमात कार्यक्रम में हिस्सा लेने के संबंध में दर्ज प्राथमिकी रद्द करने के अनुरोध वाली 24 विदेशी नागरिकों की याचिकाओं पर शुक्रवार को केंद्र और पुलिस से जवाब देने को कहा।
इन विदेशी नागरिकों पर देश में कोविड-19 के मद्देनजर जारी सरकारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन कर राष्ट्रीय राजधानी में निजामुद्दीन स्थित मरकज में एक धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने और वीजा नियमों का उल्लंघन कर मिशनरी कार्य में शामिल होने का आरोप है।
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वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अनुज जयराम भंभानी ने केंद्र और दिल्ली पुलिस से अगली सुनवाई की तारीख 10 अगस्त से पहले इस मामले में अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
अदालत को सूचित किया गया कि दो अलग अलग याचिकाएं दायर करने वाले इन 24 विदेशी नागरिकों ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दर्ज प्राथमिकी में पहले ही अपना जुर्म कुबूल कर लिया है और ''प्ली बारगेन'' के प्रावधानों के अंतर्गत कम सजा की गुहार लगायी है।
विदेशी नागरिकों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने कहा कि कोविड-19 लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के मामूली अपराध को स्वीकार करने और जुर्माने का भुगतान करने के बाद इन्हें मुक्त करने की अनुमति दी गई थी।
उन्होंने कहा कि हालांकि, सीलमपुर पुलिस थाने में दर्ज अन्य प्राथमिकियों के कारण वे वापस अपने देश लौटने में समर्थ नहीं हैं।
जॉन ने दलील दी कि पुलिस एक ही कथित अपराध के लिए दो अलग प्राथमिकी दर्ज नहीं कर सकती।
वकील आसिमा मंडला और मंदाकिनी सिंह ने याचिकाओं में सीलमपुर थाने में दर्ज दो प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध किया।
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