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ट्रंप के बातचीत के दावे को संदेह से देख रहा है ईरान
स्कूल पर हुए हमले को लेकर मानवाधिकार परिषद पहुंचा ईरान
पीएम मोदी ने कहा, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भारत के लिए चिंता का विषय
ईरान युद्ध के बीच मीडिया पर पाबंदियां बढ़ा रहा है पेंटागन
लंबी वार्ता के बाद ऑस्ट्रेलिया-ईयू में ट्रेड डील पर सहमति
2027 के चुनाव से पहले इटली की पीएम मेलोनी को बड़ा झटका
दिल्ली के बजट का 21 फीसदी हिस्सा पर्यावरण के लिए खर्च होगा: रेखा गुप्ता
वजन घटाने वाली दवाओं की अवैध बिक्री रोकने के लिए सरकार ने बढ़ाई निगरानी
स्कूल पर हुए हमले को लेकर मानवाधिकार परिषद में बहस चाहता है ईरान
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में तुरंत एक बहस करवाने का आग्रह किया है. ईरान में प्राथमिक स्कूल पर हुई बमबारी को लेकर बहस का अनुरोध किया गया है. इसका शीर्षक है: अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्षों में बच्चों और शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा.
रॉयटर्स के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अली बाहरेनी ने 23 मार्च को परिषद के अध्यक्ष को भेजे अपने पत्र में लिखा, "स्कूल में कक्षाएं चलने के दौरान एक हमला, बच्चों पर एक गंभीर हमले को दर्शाता है."
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मानवाधिकार परिषद के प्रवक्ता ने भी बताया कि जेनेवा में ईरानी मिशन की ओर से भेजे गए पत्र में ईरान के अलावा चीन और क्यूबा ने भी तत्काल बहस कराने का आग्रह किया है. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, स्कूल पर हुए हमले में दो मिसाइल हमले शामिल थे और इसमें 168 बच्चे मारे गए. इनमें ज्यादातर संख्या लड़कियों की थी.
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खाड़ी के दूसरे देशों ने भी मानवाधिकार परिषद में बहस का अनुरोध किया है. उनका विषय बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नागरिक और ऊर्जा ढांचों पर ईरान का हमला है. गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल की ओर से बहरीन के आधिकारिक आग्रह पर 25 मार्च को यह सत्र बुलाया गया है. साल 2006 में गठन के बाद यह मानवाधिकार परिषद में 11वीं अत्यावश्यक बहस होगी.
पीएम मोदी ने बताया, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भारत के लिए क्यों है चिंता का विषय
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर राज्यसभा में अपनी सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि इस युद्ध ने पूरे विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है, "भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है. इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं. इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामानों की रेगुलर सप्लाई प्रभावित हो रही है."
उन्होंने कहा कि गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा भी भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता है. पीएम ने जानकारी दी, "होरमुज स्ट्रेट में दुनिया के अनके जहाज फंसे हैं. उनमें बहुत बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स हैं. ये भी भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है."
पीएम मोदी ने यह भी बताया कि भारत सभी खाड़ी देशों के लगातार संपर्क में हैं और ईरान, इस्राएल और अमेरिका से भी बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है. हमने तनाव कम करने और होरमुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी उनसे बात की है." प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का प्रयास है कि तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामान ला रहे जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचें.
करीब आठ साल बाद ऑस्ट्रेलिया-ईयू में ट्रेड डील पर सहमति, रक्षा सहयोग भी बढ़ाएंगे
लंबे इंतजार के बाद यूरोपीय संघ (ईयू) और ऑस्ट्रेलिया के बीच 24 मार्च को मुक्त व्यापार समझौते के मसौदे पर सहमति बन गई है. ऑस्ट्रेलिया और ईयू, दोनों ही अपने कारोबारी नेटवर्क में विविधता लाना चाहते हैं. इसके पीछे दो बड़ी वजहें मानी जा रही हैं. एक, चीन से आर्थिक निर्भरता घटाना और दूसरा कारण, ट्रंप के टैरिफों के कारण बनी अनिश्चितता. ईयू और ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि यह समझौता नियम आधारित व्यापार में दोनों पक्षों के फायदे को रेखांकित करता है.
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन ने ऑस्ट्रेलियाई संसद को संबोधित करते हुए एक ऐसी दुनिया की तस्वीर दिखाई, जो "क्रूर, कठोर और निर्मम" है. पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "आज हम तेजी से बदलती दुनिया को एक अहम कहानी सुना रहे हैं. दुनिया, जहां बड़ी शक्तियां टैरिफ को दबाव बनाने और आपूर्ति शृंखला को अनुचित तरीके से फायदा उठाने की कमजोरी के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं."
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ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीजी ने कहा कि जिस परिस्थिति में समझौते पर सहमति बनी, वह अहम है. करीब आठ साल पहले शुरू हुई वार्ता अक्टूबर 2023 में धराशायी हो चुकी थी, लेकिन वैश्विक स्थितियों के कारण दोबारा शुरू हुई. उन्होंने कहा, "यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया, दोनों ही दृढ़ता से कह रहे हैं कि हम मुक्त और पक्षपात रहित व्यापार में भरोसा करते हैं. हम समझते हैं कि व्यापार, कारोबार करने वाले दोनों पक्षों की संपन्नता बढ़ाता है."
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दोनों पक्षों ने एक नई सुरक्षा साझेदारी की भी घोषणा की, जो ईयू और ऑस्ट्रेलिया के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाएगी. पीएम अल्बानीजी ने बताया कि डिफेंस पार्टनरशिप, ईयू और ऑस्ट्रेलिया को वैश्विक चुनौतियों के लिए सहयोग करने का फ्रेमवर्क देगी. इसके तहत रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद से जंग और हाइब्रिड खतरों के खिलाफ लड़ाई में पारस्परिक सहयोग बढ़ेगा. अल्बानीजी ने यूक्रेन के लिए समर्थन दोहराते हुए कहा, "यह वैश्विक शांति और सुरक्षा के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है."
"मेड इन इंडिया जहाज" बनाने के लिए शुरू किया गया 70 हजार करोड़ रुपये का अभियान: पीएम मोदी
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 24 मार्च को राज्यसभा में होरमुज स्ट्रेट को लेकर अपनी सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि व्यावसायिक जहाजों पर हमला और होरमुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है. उन्होंने यह भी कहा, "मुश्किल हालात के बावजूद हमारी सरकार ने संवाद और कूटनीति के जरिए रास्ते बनाने की कोशिश की है."
उन्होंने विदेशी जहाजों पर भारत की निर्भरता के बारे में भी बात की, "भारत का 90 फीसदी से अधिक व्यापार विदेशी जहाजों पर होता है. ये स्थिति किसी भी वैश्विक संकट में भारत की स्थिति को और भी गंभीर बना देती है. इसलिए सरकार ने मेड इन इंडिया जहाज बनाने के लिए करीब 70 हजार करोड़ रुपये का अभियान शुरू किया है."
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि भारत आज शिपबिल्डिंग, शिपब्रेकिंग, मेंटेनेंस और ओवरहॉलिंग जैसी हर सुविधा के निर्माण पर तेज गति से काम कर रहा है. 'सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च' के एक आर्टिकल के मुताबिक, वैश्विक जहाज निर्माण में भारत की हिस्सेदारी फिलहाल एक फीसदी से भी कम है. वहीं, चीन की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा है. ऐसे में इस क्षेत्र में बड़ा खिलाड़ी बनने के लिए भारत को कई चुनौतियों से पार पाना होगा.
इटली की पीएम मेलोनी को पहला बड़ा झटका, 2027 में होना है संसदीय चुनाव
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की न्यायिक सुधार की अपील को जनमत संग्रह में स्वीकृति नहीं मिली. "हां" कैंप को मिले 46.5 प्रतिशत मतों के मुकाबले 53.5 फीसदी मत पाकर "नहीं" खेमा जीत गया. अनुमान से कहीं ज्यादा, तकरीबन 59 फीसदी लोगों ने जनमत संग्रह में हिस्सा लिया. नतीजा आने के बाद मेलोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "इटैलियन लोगों ने फैसला ले लिया है और हम इस निर्णय का सम्मान करते हैं."
जनमत संग्रह से पहले भी यह सवाल बना हुआ था कि क्या हारने पर मेलोनी पद छोड़ देंगी. उन्होंने इस संभावना से इनकार किया है. अक्टूबर 2022 में सत्ता में आने के बाद से मेलोनी की स्थिति काफी मजबूत रही है. वह इटली की सबसे स्थिर सरकारों में से एक का नेतृत्व कर रही हैं और एक तरह से उनकी छवि अपराजेय जैसी रही है. जनमत संग्रह उन्हें मिला पहला बड़ा झटका है.
इटली में विपक्षी दल "नो" कैंप में थे. रेफरेंडम के नतीजे से उन्हें बल मिला है. कई राजनीतिक विश्लेषक भी नतीजे को मेलोनी की राजनीतिक अपील से जोड़कर देख रहे हैं. दानिएल अलबेरतात्सी, यूनिवर्सिटी ऑफ सरे में राजनीति के प्रोफेसर हैं. उन्होंने एएफपी को बताया, "यह मेलोनी के लिए बुरा नतीजा है. इसका मतलब है कि अपने मेनिफेस्टो के एक बड़े मुद्दे पर उन्होंने इटैलियन मतदाताओं का समर्थन खो दिया है. पिछले 30 साल से यह दक्षिण धड़े के भी प्रमुख प्रस्तावों में से एक था."
रेफरेंडम में जीतकर मेलोनी जजों और प्रॉसिक्यूटरों की भर्ती और उनके कामकाज के तरीकों में बदलाव लाना चाहती थीं. उनका आरोप है कि न्यायपालिका में वामपंथी रुझान है और उसका राजनीतिकरण किया जा रहा है. मनमुताबिक नतीजा ना मिलने पर भी फिलहाल सरकार गिरने का कोई खतरा नहीं है. मगर, अगले साल इटली में संसदीय चुनाव होने हैं, जहां रेफरेंडम का फैसला भी भूमिका निभा सकता है.
वजन घटाने वाली दवाओं की अवैध बिक्री रोकने के लिए सरकार ने बढ़ाई निगरानी
भारत के दवा नियामक ने वजन घटाने वाली दवाओं की अवैध बिक्री और प्रचार के खिलाफ निगरानी बढ़ा दी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 24 मार्च को एक बयान जारी कर यह जानकारी दी. इसके मुताबिक, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने देशभर में 49 जगहों का निरीक्षण किया. इनमें दवा के थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता और वजन घटाने वाले क्लीनिक शामिल हैं.
भारत की कई दवा कंपनियों ने हाल ही में वजन घटाने वाली सस्ती दवाएं लॉन्च की हैं. इनकी कीमत नोवो नॉर्डिस्क के डायबिटीज ड्रग 'ओजेंपिक' और वजन घटाने वाली दवा 'वीगोवी' के मुकाबले 70 फीसदी तक कम है. ये दवाएं 'सेमाग्लूटाइड' इंग्रेडिएंट पर आधारित हैं, जिसके पेटेंट की समयसीमा भारत में पिछले हफ्ते खत्म हो चुकी है. यानी, अब दवा कंपनियों को इसका इस्तेमाल कर दवा बनाने की अनुमति मिल चुकी है.
ऐसी दवाएं लॉन्च करने वाली भारतीय कंपनियों में सनफार्मा, डॉ रेड्डी, जायडस, टोरेंट, ग्लेनमार्क और एल्केम शामिल हैं. ज्यादातर कंपनियों ने 'सेमाग्लूटाइड' को इंजेक्शन के रूप में लॉन्च किया है. इन दवाओं की महीनेभर की खुराक के लिए 1,300 से लेकर 8,000 रुपये तक खर्च करने होंगे. हालांकि, दवाओं को डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही लिया जा सकता है.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इन दवाओं को उचित चिकित्सकीय निगरानी के बिना लेने से गंभीर दुष्प्रभाव और स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं. इससे पहले दवा नियामक ने फार्मा कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे वजन घटाने वाली दवाओं का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रचार न करें.
ईरान युद्ध के बीच मीडिया पर पाबंदियां बढ़ा रहा है अमेरिकी रक्षा मुख्यालय
अमेरिकी रक्षा मुख्यालय 'पेंटागन' ने अमेरिका की सेना पर खबरें कर रहे पत्रकारों पर पाबंदियां बढ़ा दी हैं. 23 मार्च को पेंटागन ने एलान किया कि वह 'कॉरेस्पॉन्डेंट्स एरिया' नाम के एक प्रेस हिस्से को तत्काल प्रभाव से बंद कर रहा है. साथ ही, पेंटागन में पत्रकारों के प्रवेश के लिए विभाग के अधिकृत कर्मचारी का साथ होना जरूरी होगा.
डॉनल्ड ट्रंप बीते दिनों ईरान युद्ध के संदर्भ में अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टिंग से नाखुशी जाहिर कर चुके हैं. कई मौकों पर जब अपनी सरकार के बारे में की गई रिपोर्टिंग ट्रंप को नहीं जंची, तो उन्होंने खबर को "फेक न्यूज" बताया. मीडिया रेगुलेटर एफसीसी ने भी चेतावनी दी कि अगर प्रसारक "फेक न्यूज" से दूर नहीं रहते, तो लाइसेंस रद्द हो सकता है.
बीते हफ्ते एक संघीय जज ने फैसला सुनाया था कि 2025 में रक्षा विभाग ने प्रेस की पहुंच से जुड़ा जो बदलाव किया था, वह संविधान का उल्लंघन करता है. कोर्ट के फैसले के बाद पेंटागन सख्तियां और बढ़ा रहा है. पेंटागन के प्रवक्ता शान पारनेल ने नियम बदले जाने के लिए सुरक्षा जोखिमों का हवाला दिया. उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा विभाग कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगा.
वॉशिंगटन स्थित 'नेशनल प्रेस क्लब' ने कहा है कि नई नीति, पत्रकारों की काम करने की क्षमता को सीमित करती हैं और इससे पेंटागन में स्वतंत्र रिपोर्टिंग भी कमजोर होगी, वो भी ऐसे समय में जब जनता को अमेरिकी सेना के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए. पेंटागन ने पिछले साल एलान किया था कि न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट, सीएनएन, एनबीसी और एनपीआर समेत आठ मीडिया संगठनों को पेंटागन में दफ्तर के लिए दी गई जगह खाली करनी होगी.
ईरान और इस्राएल-अमेरिका युद्ध पर कहां खड़े हैं ब्रिक्स देश
इसके लिए आधार दिया गया कि दूसरे मीडिया संगठनों के लिए जगह बनाने की जरूरत है. साथ ही, पेंटागन में सीमित जगहों के अलावा कहीं जाने के लिए पत्रकारों को आधिकारिक एस्कॉर्ट्स के साथ होना होगा. कई अमेरिकी मीडिया समेत एएफपी और एपी जैसी अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने नई नीति पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया. इसके कारण पेंटागन में रिपोर्टिंग के लिए मिली उनकी मान्यता वापस ले ली गई थी.
दिल्ली के बजट का 21 फीसदी हिस्सा पर्यावरण के लिए खर्च होगा: रेखा गुप्ता
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार, 24 मार्च को राजधानी के लिए एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट पेश किया. उन्होंने कहा कि बजट का 21 फीसदी हिस्सा 'ग्रीन बजट' के तौर पर आवंटित किया गया है. इसे पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए खर्च किया जाएगा. उन्होंने कहा, "यह बजट शासन की सोच में एक ऐतिहासिक परिवर्तन है, जहां विकास और धरती के संरक्षण के बीच संतुलन साधा गया है."
दिल्ली के बजट में स्वास्थ्य विभाग के लिए 12,645 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. न्यूज एजेंसी 'आईएएनएस' के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि 11,666 करोड़ रुपये की राशि दिल्ली नगर निगम को दी जा रही है. लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के लिए 5,921 करोड़ रुपये, शहरी विकास के लिए 7,887 करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास के लिए 787 करोड़ रुपये और झुग्गी विकास के लिए 800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
दिल्ली का प्रदूषण, खासतौर पर जहरीली हवा एक बड़ी चिंता का विषय है. सर्दियों में मौसमी परिस्थितियों और प्रदूषकों के मेल से राजधानी और आसपास के इलाकों में स्मॉग की विकट स्थिति पैदा हो जाती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रदूषण कम करने और हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए फौरी उपाय नहीं, बल्कि विस्तृत नीति बनानी होगी.
ट्रंप के दावे को संदेह से देख रहा है ईरान, संसद स्पीकर ने बताया "फेक न्यूज"
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर कालीबाफ ने सोशल मीडिया पर लिखा, "अमेरिका के साथ कोई वार्ता नहीं हुई है." उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि वित्तीय और तेल बाजारों को प्रभावित करने के लिए "फेक न्यूज" का इस्तेमाल किया गया है. ट्रंप के दावों के मद्देनजर ईरानी संसद के एक सदस्य ने भी चेताया है कि उनके देश को "समझदारी से विचार" करना चाहिए.
ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने इस्माइल कोवसारी का बयान छापा है, "ट्रंप, नेतन्याहू और इन जैसे स्वाभाविक झूठे हैं और उनका स्वभाव बांटना है. हमें समझदारी से सोचना चाहिए. उनका स्वभाव फूट डालना है, ताकि वो लोगों में अधिकारियों के लिए अविश्वास जगाएं और लोग सोचें कि ये चीजें हुई हैं, जबकि ऐसी कोई बात नहीं हुई है." कोवसारी, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य हैं.
ईरानी तेल की खरीद पर ट्रंप प्रशासन ने दी 30 दिनों की ढील
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के दफ्तर ने बताया कि वे इस हफ्ते अजरबैजान, मिस्र, ओमान, पाकिस्तान, रूस, दक्षिण कोरिया, तुर्की और तुर्कमेनिस्तान के विदेश मंत्रियों से बात कर रहे हैं. ईरान पर अमेरिका और इस्राएल के औचक हमले शुरू करने से पहले, तेहरान और वॉशिंगटन में वार्ता हो रही थी. पिछले साल जब ईरान के साथ 12 दिन का युद्ध शुरू हुआ, उससे पहले भी दोनों पक्षों में बातचीत हो रही थी.
होरमुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान को दी गई मोहलत डॉनल्ड ट्रंप ने क्यों बढ़ाई, इसपर भी कयास लगाए जा रहे हैं. न्यूयॉर्क स्थित एक थिंक टैंक 'सूफान सेंटर' ने अपने विश्लेषण में लिखा है कि समससीमा को आगे बढ़ाना अमेरिकी मरीन्स के क्षेत्र में पहुंचने से जुड़ा हो सकता है.
विश्लेषण के मुताबिक, "जैसा कि ट्रंप पहले भी कर चुके हैं, मुमकिन है वे मिलिट्री एसेट्स को क्षेत्र में पहुंचा रहे हों. इस मामले में, खर्ग द्वीप पर हमला करने और उसपर कब्जा करने के लिए. इस दौरान, वार्ता को एक कवर की तरह इस्तेमाल करना तब तक, जब तक कि वो एसेट्स लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार ना हो जाएं."
हिंदू, सिख, बौद्ध धर्म को छोड़ कोई और धर्म अपनाने पर छिन जाएगा एससी दर्जा: सुप्रीम कोर्ट
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 24 मार्च को अपने एक फैसले में कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से संबंधित लोगों को ही अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से होने का दर्जा मिल सकता है. कोर्ट ने कहा है कि अगर एससी वर्ग का कोई व्यक्ति इन तीन धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसका एससी दर्जा छिन जाएगा.
कोर्ट ने कहा, "हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाला कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं हो सकता. किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है." कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक आदेश (अनुसूचित जाति), 1950 में यह बात स्पष्ट की गई है.
कानूनी खबरों की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक, ईसाई धर्म अपना चुके एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया. याचिकाकर्ता ने कुछ लोगों के खिलाफ एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज करवाया था. आरोपियों ने इसे चुनौती देते हुए कहा था कि ईसाई धर्म अपनाने और उसका पालन करने के चलते याचिकाकर्ता एससी-एसटी ऐक्ट के तहत मामला दर्ज नहीं करवा सकता है.
पिछले साल अप्रैल में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा था कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं है, इसलिए याचिकाकर्ता के मामले में एससी-एसटी ऐक्ट को लागू नहीं किया जा सकता. याचिकाकर्ता ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जहां शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.













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