Mumbai Monsoon 2026: मुंबई लोकल के लिए रेलवे की बड़ी तैयारी, मॉनसून में सिग्नल फेल होने से बचाएंगे 239 'डिजिटल एक्सल काउंटर', जानें कैसे काम करेगी यह तकनीक
पश्चिमी रेलवे (Western Railway) ने मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर मॉनसून के दौरान सिग्नल फेल होने की समस्या से निपटने और ट्रेनों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए 239 डिजिटल एक्सल काउंटर (DAC) स्थापित किए हैं.
Mumbai Monsoon 2026: मुंबई में मॉनसून की भारी बारिश के दौरान लोकल ट्रेनों के पहिये न थमें, इसके लिए पश्चिमी रेलवे (Western Railway) ने एक बड़ा सुरक्षात्मक कदम उठाया है. रेलवे ने अपने मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर पटरियों में पानी भरने (Waterlogging) के कारण होने वाले सिग्नल फेल्योर को रोकने के लिए 239 डिजिटल एक्सल काउंटर (DACs) स्थापित किए हैं. इसके साथ ही, बारिश के पानी से महत्वपूर्ण उपकरणों को बचाने के लिए 1,860 सिग्नलिंग प्रतिष्ठानों को वाटरप्रूफ प्लास्टिक शील्ड से कवर किया गया है. इस कदम का मुख्य उद्देश्य बारिश के मौसम में भी बिना किसी रुकावट के लोकल ट्रेन सेवाओं को सुरक्षित रूप से संचालित करना है.
क्या है डिजिटल एक्सल काउंटर और यह कैसे करता है काम?
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल एक्सल काउंटर एक आधुनिक तकनीक है जो पटरियों पर पानी जमा होने की स्थिति में भी ट्रेनों की आवाजाही को सामान्य बनाए रखने में मदद करती है. पारंपरिक ट्रैक सर्किट पानी भरने पर अक्सर शॉर्ट-सर्किट का शिकार हो जाते हैं, जिससे सिग्नल ठप हो जाता है. यह भी पढ़े: BMC Mumbai Monsoon Preparedness 2026: मुंबई मानसून से पहले बीएमसी की बड़ी तैयारी, जलजमाव वाले इलाकों में लगाएगी 547 स्मार्ट IoT पंप
इसके विपरीत, डिजिटल एक्सल काउंटर तकनीक ट्रेन के पहियों (एक्सल) को गिनकर काम करती है. जब कोई ट्रेन ट्रैक के किसी निश्चित हिस्से में प्रवेश करती है और वहां से बाहर निकलती है, तो यह सिस्टम पहियों की सटीक गिनती करता है. इससे सिग्नलिंग सिस्टम को यह स्पष्ट जानकारी मिल जाती है कि पटरी का वह हिस्सा खाली है या नहीं, जिससे जलभराव के बावजूद सिग्नल सिस्टम काम करता रहता है.
विश्वसनीयता और सुरक्षा बढ़ाने पर जोर
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों पर हर दिन लाखों यात्री निर्भर रहते हैं. ऐसे में प्रतिकूल मौसम के दौरान ट्रेनों में देरी को कम करना और परिचालन को समयबद्ध रखना रेलवे के लिए बड़ी चुनौती होती है.
अपने वार्षिक मॉनसून तैयारी कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, पश्चिमी रेलवे ने सिग्नलिंग बुनियादी ढांचे का व्यापक निरीक्षण किया है. इस अभियान के तहत अर्थिंग सिस्टम की जांच की गई है, बिजली आपूर्ति उपकरणों का परीक्षण पूरा किया गया है और केबल इंसुलेशन की बारीकी से जांच की गई है ताकि किसी भी तरह की तकनीकी खराबी को न्यूनतम किया जा सके. नमी के कारण होने वाले व्यवधानों को रोकने के लिए ऑटोमैटिक वार्निंग सिस्टम (AWS) मैग्नेट पर वाटरप्रूफ कवर भी लगाए गए हैं.
पॉइंट मशीनों और आपातकालीन स्थिति के लिए विशेष तैयारी
रेलवे ने पटरियों के एलाइनमेंट (Track Alignment) को नियंत्रित करने वाली पॉइंट मशीनों पर विशेष ध्यान दिया है. पूरे डिवीजन में मौजूद 635 पॉइंट मशीनों में से 471 को सील करके उनका सफल परीक्षण कर लिया गया है. इसके अलावा, वसई रोड और बांद्रा जैसे अत्यधिक बाढ़ प्रभावित (Flood-Prone) स्टेशनों पर विशेष वाटरप्रूफ पॉइंट मशीनें लगाई गई हैं. किसी भी आपातकालीन खराबी से तुरंत निपटने के लिए प्रमुख स्टेशनों पर सिग्नलिंग उपकरणों का अतिरिक्त स्टॉक भी पहले से रख दिया गया है.
पश्चिमी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) विनीत अभिषेक ने बताया कि मॉनसून के दौरान सुचारू ट्रेन संचालन सुनिश्चित करने और यात्रियों की असुविधा को कम करने के लिए कई ठोस उपाय लागू किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि डिजिटल एक्सल काउंटर सिस्टम इन प्रयासों का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, और यह आधुनिक तकनीक सुरक्षित और निर्बाध रेलवे संचालन बनाए रखने में मदद करती है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 12, 2026 09:51 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

