नयी दिल्ली, छह जुलाई भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-गुवाहाटी ने अपने बीटेक पाठ्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र-सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) 2030 पर एक नया कोर्स शुरू किया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि यह बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिये अनिवार्य कोर्स होगा, जिससे युवा और गतिशील व्यक्तियों की सोच को सतत विकास के रास्ते की ओर नयी दिशा दी जा सके।
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अधिकारियों के मुताबिक, 17 सतत विकास लक्ष्यों की अंतर विषय प्रकृति के कारण इस कोर्स के नोडल विभाग, मानविकी व सामाजिक विज्ञान विभाग ने संस्थान के आठ अन्य विभागों से इस कोर्स को तैयार करने और उसे लागू करने के लिये मिलकर संसाधनों को साझा किया है।
प्रत्येक विभाग के संकाय सदस्य संयुक्त रूप से इस कोर्स का संचालन करेंगे और 17 सतत विकास लक्ष्यों के तकनीकी, आर्थिक, परिस्थितिकी और सामाजिक पहलुओं से बीटेक छात्रों को रूबरू कराएंगे।
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आईआईटी-गुवाहाटी के निदेशक, टी जी सीताराम ने कहा, “इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिये अब सिर्फ 10 साल बचे हैं, ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि छात्रों को समेकित और सतत विकास के लक्ष्यों के बारे पढ़ाया जाए और अभियांत्रिकी, विज्ञान और मानविकी विभागों के संकाय सदस्यों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे इस कोर्स के जरिये छात्रों को “दुनिया को बदलने” में नेतृत्वकारी भूमिका अदा करने के लिये तैयार किया जाए।”
आआईटी गुवाहाटी के मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग से इस पाठ्यक्रम की समन्वयक अनामिका बरुआ ने कहा, “यह पहली बार है कि स्नातक स्तर पर शुरू किये जा रहे किसी पाठ्यक्रम के लिये नौ विभाग साथ मिलकर काम कर रहे हैं, उन्हें अहसास है कि सतत विकास की चुनौतियां और समावेशी वृद्धि साथ-साथ चलते हैं और अंतर विषयक नजरिये से समाज और विज्ञान की राहों को समझा जाना चाहिए।”
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