नयी दिल्ली, 22 जून दिल्ली सरकार के तरणताल में तैराकी का प्रशिक्षण देने वाले 26 वर्षीय युवक की यहां कोविड-19 से मौत के बाद उसके परिजन ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (एलएचएमसी) पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
अस्पताल ने इन आरोपों से इनकार किया है।
यह भी पढ़े | 7th Pay Commission: कोरोना संकट के बीच 7वीं सीपीसी के तहत यहां मिल रही है तगड़ी सैलरी, फटाफट करें अप्लाई.
एलएचएमसी के चिकित्सा निदेशक एन एन माथुर ने कहा, “हमने पहले ही इस मामले की जांच की है। हमारी तरफ से कोई चूक नहीं हुई।”
प्रशिक्षक के परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि मरीज की मौत के बाद उनसे उसके शव को पैक करने में मदद करने के लिये कहा गया।
यह भी पढ़े | महाराष्ट्र में बीजेपी का किसानों के कर्ज को लेकर उद्धव सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, पूछे ये सवाल.
दिल्ली सरकार के झंडेवालान स्थित तरणताल में लाइफगार्ड और तैराकी प्रशिक्षक के तौर पर काम करने वाले आशुतोष गुप्ता की 17 जून को महामारी से मौत हो गई थी। दो दिन बाद ही आशुतोष का जन्मदिन आने वाला था। चार महीने पहले उसकी शादी हुई थी।
आशुतोष के छोटे भाई अंकित ने कहा, “मेरा भाई मजबूत व्यक्ति था। उसका वजन 80 किलोग्राम था। वह हमारे परिवार का आधार था।”
उसने दावा किया कि उसके भाई को पहले से कोई बीमारी नहीं थी और वह शारीरिक रूप से फिट था।
अंकित ने बताया कि उसके भाई को बुखार था जिसके बाद वह उसे एलएचएमसी लेकर गया, जहां चिकित्साकर्मियों ने उसकी कोविड-19 जांच की। उन्होंने परिवार को बताया कि आशुतोष शक्तिशाली व्यक्ति है और “आसानी से घर पर ठीक” हो जाएगा।
अंकित के मुताबिक अस्पताल में एक चिकित्सक ने परिवार को बताया कि रिपोर्ट दो-तीन दिन बाद आएगी।
अंकित ने कहा, “घर पर आशुतोष को सांस लेने में तकलीफ थी। हमनें अपने पड़ोसियों से ऑक्सीजन सिलेंडर हमें उधार देने को कहा।”
आशुतोष के रिश्तेदार कुणाल गुप्ता ने बताया कि अस्पताल ने 14 जून को हमें बताया कि उसकी जांच रिपोर्ट खो गई है।
उन्होंने कहा, “हम फौरन सर गंगाराम अस्पताल गए जहां फिर से जांच हुई। जब उसकी स्थिति बिगड़ी तो हमनें 17 जून की सुबह उसे एलएचएमसी में भर्ती कराया।”
कुणाल गुप्ता ने दावा किया, “उसी दिन सुबह 10 बजे हमें जांच की रिपोर्ट मिली। उसमें संक्रमण की बात सामने आई लेकिन अस्पतालकर्मियों ने उसे कोरोना वार्ड में स्थानांतरित नहीं किया।”
उन्होंने बताया कि अस्पताल कर्मियों ने आशुतोष को ऑरेंज जोन में रखा जहां रिपोर्ट का इंतजार कर रहे संदिग्ध मरीजों को रखा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां साफ सफाई भी नहीं थी और बिस्तरों पर चादर भी नहीं थी।
अंकित गुप्ता ने आरोप लगाया, “मेरा भाई शौचालय में गिर गया लेकिन अस्पताल कर्मी मदद के लिये नहीं आए।”
अंकित ने आरोप लगाया, “उसकी स्थिति बिगड़ती गई और उसके मुंह से झाग निकलने लगा। हमनें चिकित्सकों से जल्दी चलने का अनुरोध किया लेकिन वे तत्काल नहीं आए।”
परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि एक सहायक ने उनसे शव को रखने, उठाने और ले जाने में मदद करने को कहा।
आशुतोष की मां और पत्नी की कोविड-19 जांच हुई है और रिपोर्ट का इंतजार है।
अस्पताल ने परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।
एलएचएमसी के चिकित्सा निदेशक एन एन माथुर ने कहा, “मरीज को 17 जून को सांस लेने में तकलीफ पर अस्पताल में लाया गया था। उसे एसएआरआई वार्ड में भर्ती किया गया था जो ऑरेंज जोन में आता है।”
माथुर ने कहा कि उसे बचाने के लिये सभी कोशिशें की गईं लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY