देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय तय करेगा कि समाधान पेशेवर पर जनसेवक की तरह मुकदमा चल सकता है या नहीं

नयी दिल्ली, एक जुलाई उच्चतम न्यायालय ने झारखंड न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली एक अर्जी पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब मांगा है जिसमें कहा गया है कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता के तहत समाधान पेशेवर एक ‘जनसेवक’ होता है और उस पर भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत सुनवाई की जा सकती है।

उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अवकाशकालीन पीठ ने एक याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया है। याचिका में उच्च न्यायालय के पांच अप्रैल के आदेश को चुनौती दी गयी है।

इस याचिका में अनुरोध किया गया है, ‘‘विशेष अनुमति याचिका पर प्रतिवादी को नोटिस जारी किया जाए।’’

शीर्ष अदालत संजय कुमार अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई कर रही है। अग्रवाल ने झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी है।

याचिका में कहा गया है, ‘‘इस याचिका में कानून का एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया है जिसके भारत की विभिन्न अदालतों के समक्ष लंबित विभिन्न कार्यवाही के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। वह यह प्रश्न यह है कि क्या दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता के तहत समाधान पेशेवर भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के अंतर्गत एक जनसेवक होता है और इस तरह उस पर इस अधिनियम के तहत अदालती कार्यवाही एवं मुकदमा चलाया जा सकता है।’’

उच्च न्यायायल ने व्यवस्था दी थी कि समाधान पेशेवर भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत ‘जनसेवा का कार्य’ करता है, इसलिए ‘जनसेवक’ पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

उच्च न्यायालय ने कहा था, ‘‘ समाधान पेशेवरों की नियुक्ति राष्ट्रीय कंपनी कानून अधिकरण द्वारा की जाती है जो दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता 2016 के तहत कंपनियों की दिवालिया समाधान प्रक्रिया के अंतर्गत न्याय करने वाला प्राधिकार है। समाधान पेशेवर की दिवालिया समाधान प्रक्रिया में तथा कार्पोरेट ऋणकर्ता की संपत्तियों की रक्षा में अहम भूमिका होती है ।’’

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