नयी दिल्ली, 19 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) को पांच बंद आश्रय गृहों की स्थिति पर तस्वीर के साथ एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। डीयूएसआईबी ने बेघर लोगों के लिए बने इन आश्रय गृहों को उनकी जीर्ण-शीर्ण स्थिति के कारण कथित तौर पर बंद कर दिया था।
न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने डीयूएसआईबी के वकील से इन आश्रय गृहों की स्थिति के बारे में दो सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा।
यह निर्देश तब आया जब वकील प्रशांत भूषण ने शीर्ष अदालत को बताया कि डीयूएसआईबी ने दांडी पार्क के पास पांच आश्रय गृहों को बंद कर दिया है, जिससे बेघर लोगों को सर्दियों में सड़कों पर रहना पड़ रहा है।
प्रशांत भूषण ने कहा, ‘‘पिछले साल 28 मार्च के अपने आदेश में उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में शहरी बेघरों के लिए बने आश्रय गृहों को बिना उसकी अनुमति के तोड़ने पर रोक लगा दी थी, लेकिन आदेश के बावजूद डीयूएसआईबी ने अब आश्रय घरों पर ताला लगा दिया है और लोग सड़क पर रहने के लिए मजबूर हैं। यह अदालत के आदेश की अवमानना है। यहां एक से दो लाख लोग बेघर हैं, जबकि इसकी तुलना में आश्रय गृह 20 प्रतिशत भी नहीं हैं।’’
डीयूएसआईबी की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि पिछले साल जून और जुलाई में यमुना में आई बाढ़ के बाद आश्रय गृह जर्जर स्थिति में थे।
डीयूएसआईबी के वकील ने कहा, ‘‘हमने शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की थी, जिसमें हमने प्रस्ताव दिया था कि इन आश्रय गृहों में रहने वाले लोगों को स्थायी रूप से गीता कॉलोनी में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। मामला विचाराधीन है। पांच आश्रय गृह रहने लायक नहीं हैं।’’
उन्होंने कहा कि बोर्ड ने संकल्प लिया है कि इस सर्दी में ठंड से एक भी व्यक्ति की मौत नहीं होने देंगे।
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