देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने 34 महिला सैन्य अधिकारियों की पदोन्नति के बारे में केंद्र से पूछा

नयी दिल्ली, पांच दिसंबर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र से पूछा कि उसने उन 34 महिला सैन्य अधिकारियों के बारे में क्या कदम उठाने का सोचा है जिन्होंने 2020 में शीर्ष अदालत के निर्देशों पर स्थायी कमीशन दिये जाने के बाद पदोन्नति में देरी का आरोप लगाया है।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिंहा की पीठ को केंद्र तथा सशस्त्र बलों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर बालसुब्रमण्यम ने बताया कि 22 नवंबर को इस अदालत में पिछली सुनवाई के बाद से किसी अधिकारी को पदोन्नत नहीं किया गया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘‘यह मेरा दावा है। मैंने पिछली सुनवाई पर बयान दिया था, उसके बाद से किसी को पदोन्नत नहीं किया गया है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हम शुक्रवार को इस पर सुनवाई करेंगे। हम सुनिश्चित करेंगे कि न्याय हो।’’

उसने यह भी कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि आप हमें बताएं कि आप इन महिला अधिकारियों की अर्जी पर क्या करने वाले हैं।’’

पीठ ने महिला अधिकारियों की याचिका पर अगली सुनवाई के लिए नौ दिसंबर की तारीख मुकर्रर की।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने 34 महिला अधिकारियों की याचिका पर केंद्र से जवाब देने को कहा था जिन्होंने स्थायी कमीशन दिये जाने के बाद पदोन्नति में देरी का आरोप लगाया था।

पीठ ने कहा था, ‘‘हम चाहते हैं कि इन सभी महिला अधिकारियों को वरिष्ठता क्रम मिले।’’

कर्नल प्रियंवदा ए मार्डीकर और कर्नल आशा काले समेत महिला सैन्य अधिकारियों ने याचिका दाखिल की थी जो स्थायी रूप से कमीशन प्राप्त अधिकारी हैं।

उन्होंने कथित तौर पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए दावा किया कि दो महीने पहले बुलाये गये एक विशेष चयन बोर्ड ने कथित तौर पर उनसे बहुत जूनियर पुरुष अधिकारियों की पदोन्नति पर विचार किया था।

पीठ ने पूछा, ‘‘आप पुरुष अधिकारियों के खिलाफ चयन बोर्ड क्यों बुला रहे हैं, महिलाओं के लिए क्यों नहीं?’’

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