देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली के मुख्य सचिव की नियुक्ति के लिए पांच अधिकारियों के नाम सुझाने को कहा

नयी दिल्ली, 24 नवंबर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र से दिल्ली के नये मुख्य सचिव की नियुक्ति के लिए 28 नवंबर की सुबह साढ़े दस बजे तक पांच वरिष्ठ नौकरशाहों के नाम सुझाने को कहा। न्यायालय ने कहा कि दिल्ली सरकार को उसी दिन जवाब देना होगा ताकि इस जटिल मुद्दे पर फैसला सुनाया जा सके।

मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल (एलजी) वी. के सक्सेना के बीच एक और टकराव हो गया है।

केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल और आम आदमी पार्टी सरकार के बीच अनेक मुद्दों पर टकराव की स्थिति बनी हुई है।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

अदालत ने पूछा कि उपराज्यपाल सक्सेना और मुख्यमंत्री केजरीवाल मिलकर पद के लिए नाम पर सौहार्दपूर्ण चर्चा क्यों नहीं कर सकते?

दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) के नये प्रमुख की नियुक्ति को लेकर मतभेदों के बीच उच्चतम न्यायालय ने 17 जुलाई को दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल और उपराज्यपाल सक्सेना से इस पद के लिए पूर्व न्यायाधीशों के नामों पर विचार-विमर्श करने को कहा था।

न्यायालय ने कहा था कि संवैधानिक पदों पर बैठे दोनों लोगों को ‘राजनीतिक कलह’ से ऊपर उठना होगा।

दोनों पदाधिकारियों की बैठक के बावजूद हालांकि गतिरोध बना रहा और अंततः शीर्ष अदालत ने डीईआरसी अध्यक्ष की नियुक्ति की।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि मुख्य सचिव पद के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सुझाए जाने वाले पांच वरिष्ठ नौकरशाहों के नाम मंगलवार की सुबह 10.30 बजे तक उसे बताये जाये।

शुरुआत में दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि दिल्ली में सेवाओं से संबंधित नए कानून को शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई है और उपराज्यपाल एकपक्षीय तरीके से अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

दिल्ली सरकार से परामर्श के बिना मुख्य सचिव की नियुक्ति करने या मौजूदा मुख्य सचिव नरेश कुमार का कार्यकाल बढ़ाने के केंद्र के किसी भी कदम के खिलाफ याचिका दायर की गई है। कुमार 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

दिल्ली सरकार ने पूछा कि केंद्र सरकार उससे परामर्श के बिना मुख्य सचिव की नियुक्ति की प्रक्रिया को कैसे बढ़ा सकती है जबकि नये दिल्ली सेवा कानून को चुनौती दी गई है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री बैठक क्यों नहीं कर सकते? पिछली बार हमने डीईआरसी अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए भी यही बात कही थी और वे कभी तैयार नहीं हुए।’’

पीठ ने प्रस्ताव रखा, ‘‘उपराज्यपाल और केंद्र नामों की सूची क्यों नहीं पेश करते? अंतिम चुनाव तो आपकी सूची से ही होगा। आप एक सूची प्रस्तुत करें। फिर वे (दिल्ली सरकार) एक नाम तय करेंगे।’’

केंद्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि रुख हमेशा से यह रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुख्य सचिव की नियुक्ति की है।

सिंघवी ने कहा कि मुख्य सचिव को मुख्यमंत्री की सिफारिश पर नियुक्त किया गया था।

मेहता ने कहा, ‘‘कभी नहीं। मैं हलफनामे पर लिखकर दे सकता हूं।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमारे पास एक ऐसा तरीका होना चाहिए जिसके तहत सरकार काम करे। मुझे यकीन है कि आप दोनों हमें कोई रास्ता सुझा सकते हैं।’’

उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा, ‘‘मुझे यह कहते हुए खेद है कि मुख्य सचिव के खिलाफ बयानबाजी हो रही है और उन्हें झूठे आरोपों के खिलाफ अदालत का रुख करना पड़ा था।’’

पीठ ने अगली सुनवाई के लिए अगले मंगलवार का दिन तय किया।

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