नयी दिल्ली, आठ जुलाई उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने कहा कि खेल के क्षेत्र में लैंगिक दुर्व्यवहार से निपटने के लिए एक मजबूत तंत्र की स्थापना आवश्यक है, क्योंकि माहौल को समावेशी बनाने से ही यह संदेश जाएगा कि खेल के क्षेत्र में महिलाएं किसी भी प्रकार के भेदभाव और प्रताड़ना से सुरक्षा और सम्मान की हकदार हैं।
‘खेलों के जरिये महिला सशक्तिकरण’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में न्यायमूर्ति कोहली ने उक्त बात कही। उन्होंने खेलों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सुधार की बात करते हुए कहा कि खेल के क्षेत्र में लैंगिक हिंसा, भेदभाव और प्रताड़ना से निपटने के लिए तंत्र स्थापित करने के लक्ष्य से नीतियां बनायी जानी चाहिए।
दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘कैंपस लॉ सेंटर’ (लॉ फैक्ल्टी) में आयोजित कार्यक्रम के उद्घाटन भाषण में न्यायमूर्ति कोहली ने कहा, ‘‘न्यायिक फैसले दिशा-निर्देशों की भांति काम करते हैं, लेकिन खेलों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के लिए प्रभावी नीतिगत सुधार भी आवश्यक है।’’
न्यायमूर्ति कोहली ने कहा, ‘‘इन नीतियों को विभिन्न पहलुओं जैसे समान अवसर सुनिश्चित करना, वित्तीय सहायता मुहैया कराना और खेल के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लैंगिक हिंसा, भेदभाव और प्रताड़ना की सूचना देने और उसके समाधान के लिए तंत्र स्थापित करना आदि की समीक्षा करनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे दुर्व्यवहार की घटनाओं की सूचना देना और समय पर उनका समाधान करने के लिए मजबूत तंत्र की स्थापना आवश्यक है। इसमें हेल्पलाइन स्थापित करना, शिकायतों की जांच के लिए स्वतंत्र वैधानिक समिति का गठन और गलती करने वालों पर कड़ा दंड आदि शामिल है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सुरक्षित और समावेशी माहौल बनाने से पूरे समाज में यह संदेश जाएगा कि खेल के क्षेत्र में महिलाएं सम्मान, गरिमा और किसी भी तरह के भेदभाव और प्रताड़ना से सुरक्षा की हकदार हैं।’’
न्यायमूर्ति कोहली ने समान आर्थिक अवसरों के साथ-साथ महिलाओं की समान भागीदारी और मीडिया में पूर्वाग्रह मुक्त प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने की भी वकालत की।
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