जरुरी जानकारी | शेयर बाजार में सातवें दिन तेजी; आईटी शेयरों, एफआईआई की लिवाली से सेंसेक्स 80 हजार के पार

मुंबई, 23 अप्रैल शेयर बाजारों में बुधवार को लगातार सातवें दिन तेजी जारी रही और प्रमुख शेयर सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 520 अंक उछलकर चार महीने में पहली बार 80,000 से ऊपर बंद हुआ।

बाजार में तेजी की कमान आईटी और वाहन शेयरों ने संभाली। इस दौरान 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 520.90 अंक यानी 0.65 प्रतिशत बढ़कर 80,116.49 पर बंद हुआ। यह 18 दिसंबर के बाद इसका उच्चतम बंद स्तर है। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 658.96 अंक यानी 0.82 प्रतिशत बढ़कर 80,254.55 पर पहुंच गया था।

एनएसई निफ्टी 161.70 अंक यानी 0.67 प्रतिशत बढ़कर 24,328.95 पर पहुंच गया। विश्लेषकों ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की लिवाली और सकारात्मक वैश्विक रुझानों ने भी बाजार धारणा को मजबूत किया।

सेंसेक्स की कंपनियों में एचसीएल टेक ने सबसे अधिक 7.72 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। इसके अलावा टेक महिंद्रा, टाटा मोटर्स, इंफोसिस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा स्टील, भारती एयरटेल और मारुति भी उल्लेखनीय बढ़त हुई।

हाल में तेज बढ़त के बाद बैंक शेयरों में बिकवाली देखी गई और एचडीएफसी बैंक 1.98 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसके अलावा कोटक महिंद्रा बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, आईटीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट भी नुकसान में रहे

एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की और हांगकांग का हैंगसेंग लाभ में रहे। चीन का शंघाई कम्पोजिट मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।

यूरोप के बाजार दोपहर कारोबार में अच्छी तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे। मंगलवार को अमेरिकी बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए।

शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 1,290.43 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ''भारतीय शेयर बाजार ने अपनी सकारात्मक गति को बनाए रखा। इसका कारण आईटी कंपनियों का बेहतर वित्तीय परिणाम है। हालांकि, हाल में हुई तेजी के बाद वित्तीय क्षेत्र में मुनाफावसूली दिखाई दी।''

उन्होंने कहा कि अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव कम होता दिख रहा है और अमेरिकी प्रौद्योगिकी शेयरों में तेजी ने समग्र वैश्विक बाजार की धारणा को मजबूत किया है।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.35 प्रतिशत बढ़कर 68.35 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

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